मैं हसता हूं।
मगर अब इस हसी में वो बात नहीं।
तुम दिखती हो हर रोज
मगर अब तुम्हें देखने में वो मज़ा नहीं
तुम्हने मेरे संग बेवफ़ाई की
ये मेरे लिए कोई बड़ी सजा नहीं।
तू एक बार नहीं
हजार बार रूठ के बैठ जा,
मगर सिर्फ एक बार कह दे
तुझे अब मुझसे प्यार नहीं।
छोड़ के चला जाहुंगा मैं
तुम्हारे इस जहां को
बस एक बार कह दे यारा
की अब हम यार नहीं।
शुरी मार चाकू मार चाहे गला घोट के मार
मुझे तुम्हारे किसी भी वार पर ऐतराज नहीं
बस सिर्फ एक बार मुस्कुरा कर कह दे
की तू बेवफ़ा यार नहीं।
मैं हसता हूं, हसाता हूं।
हसी की आड़ में दर्द को छुपाता हूं
तुम्हारे जाने का अहसास
रूह तक को नहीं होने देता हूं।
रातों में अकेला रोता हूं।
मगर दोस्तो की महफ़िल में खुलकर हसता हूं
इन आंखों की उदासी छुपाने को
तुम्हारे जिक्र के साथ हंसता और हसाता हूं
फिर भी नहीं जान पाया ये जमाना
किसका हूं में दीवाना।
और किससे करता हूं प्यार
तुम्हारी जुदाई के बाद पागल होकर
हर लम्हे को तुम्हारी बेवफ़ाई के जश्न में मानता हूं
लोग पूछते है। ये आंसू कैसे तो,
मैं दर्द के आंसूओं को भी
खुशी के आंसू बताता हूं।
तुम नहीं तो नहीं सही
तुम्हारी यादों से दिल को बहलाता हूं।
मेरी वफाई की सजा
सिर्फ तुम्हारी बेवफ़ाई कम नहीं,
तुम्हारी यादों में तिल तिल मरने जैसा मज़ा तो
उस सोने की कटार में भी नहीं।
तुमने इतनी बेशर्मी से कैसे कह दिया
खुद को बचाकर मुझे बदनाम कर दिया
मैं तुम्हारी किसी भी नादानी से नाराज़ नहीं।
क्योंकि मैं जानता हूं कि
यह तुम्हारी आवाज नहीं।
मैं सुनना चाहता हूं
आज फिर से वो तुम्हारी आवाज़
एक बार आकर बोल दे यारा
की यार हमदम मैं
तुम्हारे लिए फिर से लौट आईं हूं आज।
तुम्हारे लिए फिर से लौट आईं हूं आज।
एन आर ओमप्रकाश हमदम।