उनके लिखे उपन्यासों का मसला उस औरत और मर्द के रिश्ते पर रहा, जो इंसान को इंसान के रिश्ते तक पहुंचाता है और फ़िर एक देश से दूसरे देश के रिश्तों तक..पर यह रिश्ता अभी उलझा हुआ है..क्यूंकि अभी दोनी अधूरे हैं दोनों ही एक दूजे को समझ नही पाए हैं..उनके अनुसार हम लोग जवानी.खूबसूरती की कोशिश को कुछ सुखों और सहूलियतों की कोशिश को मोहब्बत का नाम दे देते हैं..लेकिन मोहब्बत जैसी घटना सिर्फ़ एक किसी “पूरे मर्द “या “पूरी औरत” के बीच घट सकती है..”पूरी औरत “से यहाँ उनका मतलब पूछा गया तो जवाब बहुत खूबसूरत दिया उन्होंने..”वह औरत जो आर्थिक तौरपर, जज्बाती तौर पर और जहनी तौर पर स्वंतंत्र हो..आजादी कभी किसी से मांगी या छीनी नही जा सकती है..न ही यह पहनी जा सकती है, यह वजूद की मिटटी से उगती है..
मातृभारती पर इस कहानी 'आधी नज्म का पूरा गीत - 10' पढ़ें
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