हर कोई यही कह रहा है कि अगर भारत अपने पर आ गया तो, अगर भारत का खून खौला तो पाकिस्तान की तबाही निश्चित है। मैं यह समझ नहीं पा रही कि भारत है कौन? कोई व्यक्ति विशेष है क्या? तो उसका इतना सब देखने के बाद भी खून क्यों नहीं खौला? अपने पर अभी तक क्यों नहीं आया?
चालीस लोगों की एक साथ शहादत उतने लोग घायल हुए फिर एक मेजर की शहादत क्या खून खौलाने और अपने पर आने के लिए काफी नहीं है? हर भारतीय यही चाहता है का अब बातें नही, आश्वाशन नहीं बदला चाहिए सिर्फ बदला....
मुझे तो लगा था भारत हम से है हम भारतीयों से है और हमारा खून तो जोरों से खौल रहा है हमारा बस चले तो हम भारत के अन्दर के गद्दारों को और पूरे पाकिस्तान को जड़ से खत्म कर दें हममें वो पावर नहीं है लेकिन सरकार के पास तो है और सरकार भी तो भारत ही है। कहते हैं जो बादल गरजते हैं वो बरसते नहीं और यहाँ अभी तक सिर्फ गर्जना ही हो रही है।
कोई राजनीति कर रहा है तो कोई टीआरपी बढ़ाने में लगा है तो कोई टीवी में आने के लिए नारे बाजी कर रहा है। लेकिन क्या कोई भी उन परिवारों के दर्द को समझ पा रहा है उसे महसूस कर पा रहा है। वो माँ जो कह रही मेरे लाल को ला कर मेरे सीने से चिपका दो या वो पत्नी जो रहदम बेहोश हो जा रही है या वो बेटी जिसके हाथ सेल्यूट में हाथ तो उठे हैं लेकिन आँखें शून्य हो गयी हैं या वो मंगेतर जो शादी से पहले ही विधवा हो चुकी है, इनमें से किसी के भी दर्द को कोई भी महसूस कर पा रहा है अगर हाँ तो इस आग को बुझने नहीं देनी है और धधकानी तब तक जब तक कि भारत के अन्दर छिपे गद्दारों को खत्म न कर दिया जाय और पाकिस्तान जड़ से नष्ट न हो जाय.....