!! अब और नहीं !!
जो कल हमने मंझर देखा, धरती माँ के लालों का, नेताओं से पूछ रहा हूँ उत्तर कुछ सबालों का।
सेना को कब छूट मिलेगी, सेना पलट के बार करे, इस धरती से दुष्टों का सेना कब संघार करे।
ख़त्म कर दो धरती से दुश्मन, दोबारा न उठ पाएं जो, फोड़ दो सबकी आँखे फिर न आँख दिखायें वो।
कुर्शी के लालच में नेता आतंक को क्यूँ झेल रहे, सुहाग नारी का माँ के लाल को बमबारी में ठेल रहे।
गुरु गोविन्द ने धनुष उठाया, अब ब्रम्होस उठा लो तुम, भारत माता की आन बान को, गदारों से बचा लो तुम।
जिस दिन गदारों को साफ़ करोगे, भारत के लाल कहलाओगे, आतंक मिटाकर धरती से, इन वीरों को श्रदांजली दे पाओगे।
नहीं कर सकते ये सबकुछ तो कन्दरों में छुप जाओ तुम, चूड़ियाँ पहन लो हाथों में गीदड़ की जात कहलाओ तुम।
बरना बनके बन्दा बहादुर, दुश्मन का संघार करो, झाँसी की रॉनी जैसा दुश्मनों पर तुम बार करो।
श्री गुरु गोविन्द सा योद्धा बनकर दुश्मनों को ललकार करो , घर में घुसकर चुन चुन मारो, दुष्टों का संघार करो।
ध्यान जरा ये तुम रख लेना, कमजोरों पर बार न करना, चुन चुन मारना गदारों को, दुष्टो से तुम प्यार न करना।
गुरु तेगबहादुर सीस दिए भारत की लाज बचाने को, गुरु गोविन्द सिंह जी अवतार लिए, दुष्टों के ज़ुल्म मिटाने को।
चमकौर में हुई लड़ाई दो बेटे तब बार दिए, दो बच्चे दीवारों में चिन गए, धर्म की न हार किये।
जब भी ज़ालिम थर्राया था, अब भी ज़ालिम थर्रायेगा, भारत तो सदियों से है भारत, पर पकिस्तान मिट जायेगा ।
इस धरती से पाकिस्तान का नक्सा ही मिट जायेगा, हर जुल्मी का अंत हुआ है, इसका भी हो जायेगा।
जो भी ये कर पायेगा, वो नया इतिहास रच जायेगा, युगों युगों तक भारत माँ का बेटा वो कहलायेगा।
बहुत जख़्म हैं झेल के बैठे, मुड़कर अब प्रहार करो, बड़ा समझाया ज़ालिम को अब ज़ालिम का संघार करो-3
!! अब और नहीं !!
जो कल हमने मंझर देखा, धरती माँ के लालों का, नेताओं से पूछ रहा हूँ उत्तर कुछ सबालों का।
सेना को कब छूट मिलेगी, सेना पलट के बार करे, इस धरती से दुष्टों का सेना कब संघार करे।
ख़त्म कर दो धरती से दुश्मन, दोबारा न उठ पाएं जो, फोड़ दो सबकी आँखे फिर न आँख दिखायें वो।
कुर्शी के लालच में नेता आतंक को क्यूँ झेल रहे, सुहाग नारी का माँ के लाल को बमबारी में ठेल रहे।
गुरु गोविन्द ने धनुष उठाया, अब ब्रम्होस उठा लो तुम, भारत माता की आन बान को, गदारों से बचा लो तुम।
जिस दिन गदारों को साफ़ करोगे, भारत के लाल कहलाओगे, आतंक मिटाकर धरती से, इन वीरों को श्रदांजली दे पाओगे।
नहीं कर सकते ये सबकुछ तो कन्दरों में छुप जाओ तुम, चूड़ियाँ पहन लो हाथों में गीदड़ की जात कहलाओ तुम।
बरना बनके बन्दा बहादुर, दुश्मन का संघार करो, झाँसी की रॉनी जैसा दुश्मनों पर तुम बार करो।
Bs अब और नहीं, अब और नहीं, अब और नहीं, bs अब और नहीं