जब इंसान अकेला हो जाता है सच होने के बावजुत लड न सके या तो हार कर नतमस्तक होता है या तो मोत को या कोई ओर ही राह पकड लेता है | समझाते रेहना जरुरी है विश्वास रख की एक न एक दिन मेरा सच सबको पता चलेगा | वैसे भी कोई समझ सुन न रहा पागल कहे, निकम्मा बोले, जीद्दी बोले जो कुछ भी बोले बीना कुछ सुने अपनी बात रखनी है बस ! रखो एक बार दो बार दस बार जब-तक न समझे उतनी बार पर देखना सामने वाला पागल न हो जाए | जब कभी लगे बोल दे | बात मनमे रखते है तो ही तकलीफ होती है | खुल कर जीए इज्जत चली जाएगी या नाक कट जाएगी या मना न कर सके तो बहोत तकलीफ होती है | समझे और समझाए | बस ! इतना ही करना है | पर न समझे इसलिए गलत सीधा ही फैसला हो जाता है तो तकलीफ होती है |...ॐD