एक अरसे बाद प्रदेश से गांव लौट आया
प्रदेश की हवा संग वो बोली बदल आया
खमा गनी की जगह में हाय हैलो बोल गया
चौपाल में विराजे बुजुर्गो ने जोरों से बवाल किया
प्रदेश सु अयो छोरा संस्कार तू भूल आया
राम राम खमा गनी को हाय हाय बना लाया
मारवाड़ी नहीं सही तू हिंदी भी भूल आया
भाषा ओर बोली के बीच वो समझाइश पर अड गया
पंच परमेश्वर के आदेशों ने छोर को ये समझाया
प्रेदेशा सु आयो छोरो सही गलत तू अब हमे बतलाएगा
विदेशी की भाषा को तू गांवों में ना आजमाएगा
जब भी बोलेगा तू अपनी भाषा में ही बतलाएगा
प्रिय अपनी सबकी भाषा मारवाड़ी सभी समझ जाता
पूर्वजों की गलती ने संस्कृत को भी भुला दिया
अब हमारी पीढ़ियों ने अंग्रेजी को अजमालिया है
मारवाड़ी नहीं सही हिंदी को भी भुला दिया है
भाषा के चक्कर में बात ओर पेचिंदा करता गया।
आप अपने ओर तुम तुम्हारे सभी को यू बना दिया है
भ्राता को भाई नहीं, वो ब्रो कहकर बुला रिया
मां को ममी से मोम ओर पापा को डेड बना दिया
राज में नो कोश सु वाणी पलटे
फिर भी राज में मारवाड़ी झलके।
एक अरसे बाद प्रदेश से वो गांव लौट आया।
राम राम ख़मा गनी को वो हाय हाय में बदल लाया।
कवि नेनाराम सैनी।
9783450868