जीत के धुन,
हमेशा मेरे कानो में बजते रहते थे,
चाहे मै जीतता था,
या फिर हार का सामना करना पड़ता था,
क्योंकि,
मै वास्तव मे तो अजेय ही था,
ना कभी हारता था,
ना कभी मरता था,
पूरी दुनिया को अपने अंदर समेट कर,
उसको दृश्य रूप बनाता था,
सारे द्वंद जिससे मै लड़ता था,
मेरे ही बनाए क्रीडा मात्र थे,
मै ही जीतता था,
और मै ही हारता था,
जीत धुन हमेशा मेरे कानो में बजते रहते थे,
क्योंकि हमेशा मै ही जीतता था।
© krishnakatyayan 2019