जब मनुष्य जन्म लेता है तो उसके पास सांस होती है पर कोई नाम या पहचान नही होता,परन्तु जब मनुष्य की मृत्यु होती है तो उसके पास नाम और पहचान तो होता है पर सांस नही होता।
जन्म औऱ मृत्यु के बीच का यही सफर जीवन कहलाता है। इसे न तो किसी के प्रभाव में रह कर जियो न किसी से आभार में लेकर जीयो।
ये जीवन आपके स्वयं की है इसलिए इसे खुद के हिसाब से जियो।