अेक ही सवभिमान हे,
अेक ही सम्मान हे.
अेक ही जूनु न हे,
अेक ही जजबात हे.
सरताज हे हिमालय,
सरिता हे यह गंगा..
ऊतर मे हे ऊतराखड,
दक्षिण मे हे केरल.
पश्चिम मे हे यह गुजरात,
पूरब मे आसाम .
राज्शथान का हे ऊआब,
मध्य प्रदेश का गुरूर हे
जीस की आवाज़ है
दिल्ली ही दिल्ली ही.. हरे खेत लहेरा हे जहाँ,
हर अावाज महे का ये यह
हा यह सान हे भारत
यह स्वभिमान हे भारत.
गाधी की सरताज हे यह,
अेकता की साथ हे सरदार...
हा यह युवा भूमि हे
हा यह वीर अौर विरागनी भूमि हे
सदा अेक रहे नेक रहे यह मेरा वतन..
हिद की आवाज़ हु.