"दिल की बातें"
नमस्कार,
आज से मैं यहाँ अपना ब्लॉग
लिखना शुरू कर रही हूँ जिसमें समसामयिक विषयों के साथ अपने जीवन के कुछ विशेष अनुभव भी साँझा करने की कोशिश करूँगी।आपकी प्रतिक्रियाओं की अपेक्षा रहेगी।
"सामाजिक,मानसिक अस्वच्छता अभी और बढ़ेगी"
इस समय किसी की बारात में डीजे पर सड़क पर तेज आवाज में अश्लील और भद्दे गाने ज़ोर से बजाए जा रहे हैं, क्या इस बारात में महिलाएँ नहीं होंगी, क्या वो खुद इस तरह के गीतों पर डांस नहीं कर रही होंगी..,पुरुष तो दोषी हैं ही,क्या महिलाएँ भी खुद अपना और महिला जाति का
अपमान नहीं कराती?मेरे घर के पास एक 60-65 साल की बुजुर्ग दादी अपने तीन के पोते (हाँ वही परमेश्वर जी ) के सामने रोज एक अभद्र गाना.. 'लड़की....'
(आगे लिखने और सुनने के मेरे संस्कार भी नहीं है)
बड़े ज़ोर-2 से गाती हैं,क्या उस महिला को समझ नहीं कि वो क्या कर रही है कि हँसी-मजाक में भी वो अपने पोते को क्या संस्कार दे रही है... क्या बड़े कभी अपने आचरण पर गौर करते हैं, क्या ऐसे वातावरण में जहाँ महिलाओं के लिए अभद्र शब्द और गानों को इस तरह से प्रोत्साहन मिलता हो,कोई बच्चा क्यों आगे जाकर महिलाओं का सम्मान करेगा।पिछले कुछ सालों से लगातार महिलाओं के प्रति अपराध में वृद्धि हुई है और इसमें तब तक कमी नहीं होगी जब तक परिवार, समाज में परिवर्तन नहीं आए..और ऐसा होता नहीं दिखता.. तो महिलाओं के साथ अपराधों में वृद्धि होती ही रहेगी जिसका जिम्मेदार समाज खुद है.....
मैंने नई फिल्में देखना, भले ही वो सुपरहिट क्यों ना हो,बंद कर दिया है कई सालों से क्योंकि अश्लीलता और अश्लील शब्दों का प्रयोग आज की लगभग हर फिल्म का एक हिस्सा बन चुके हैं जिसे बर्दाश्त करना मेरे लिए बहुत मुश्किल है।
प्रांंजल,
25/01/19,
10.30P
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