मेरी नजर तेरे होने बयां करती है.
मेरी कदम तेरे और बढ रहे है....
ए कब हुआ कैसे हुआ हमे भी न पता.....
तेरी बाते हमको रुलाती है,
तेरे होने हमको महेफूस होने
का अहसास करताती है,
हम कब तेरी आंखों
से आंख लड गई,
ए कब हुआ कैसे
हुआ हमे भी न पता..........
जब हम सोचते तब तुम्हारे
खयालो ने हमको कुछ सोचने से,
भी भटका दिया,
तेरी बाते भी तुम्हारी तरह खास थी
तुम्हारे मेरे पास होने का सबुत दे रही है
ए कब हुआ कैसे हुआ हमे भी न पता.....
उलझन भी बहुत थी,
पर कैसे रोके हम
अपने खुद को तेरी तरफ बढने से
ए कब हुआ कैसे हुआ हमे भी न पता...........
दिल दर्द से सिस्का रहा है,
आंखें रो रो कर सुख गई,
मन तेरे ख्यालो मैं कैसे फँसा ,
ए कब हुआ कैसे हुआ हमे भी न पता.............
Shaimee oza