अजब मेरे दिल का पागलपन हे
गजब चाहत का फ़साना हे
जो मिल गया उसे गैर मान लिया
जो गैर रहा उसको पाना हे
एक तरफ दिल की बेचैनी खींचे
और दूसरी तरफ ये ज़ालिम ज़माना हे
ढूंढ रही हू रस्ता रस्ता
किस मंज़िल पर मेरा ठिकाना हे
कभी नजरो से नज़रे हे मिलती
तो कभी दुनिया से रिश्ता निभाना हे
एक रूप में दो पहलू हे मेरे
यही मेरा किस्सा पुराना हे।