"रिश्ता"
हो तो चायपत्ती के जैसा
रंग चढ़े तो ऐसा चढ़े की उसकी
कड़क में भी अच्छा लगे
"प्यार"
हो तो चीनी के जैसा
खुद घुल के मिट जाए लेकिन
एक गहरी मिठास छोड़ जाए
"दोस्ती"
हो तो दूध के रंग जैसी
जो अपनी रंगत पे गुमान करने की बजाए
दूसरे के रंग में रंग जाए
पर रिश्ता चाहे खून का हो ,
मोहब्बत का हो या दोस्ती का
हो तो बस एक कप चाय जैसा हो