मेरी ताजातरीन ग़ज़ल # ज़िक्र आते ही उनका
ग़ज़ल:- ज़िक्र आते ही उनका
ज़िक्र आते ही उनका , ये वादा तोड़ देती हैं ।
बड़ी कमज़ोर हैं आँखें , हौसला छोड़ देती हैं ।।
ज़िक्र आते ही उनका.......
कि फूलों को तकब्बुर था , बड़े ही खूबसूरत हैं ।
मगर कमसिन हशीनाएँ , पंखुड़ी तोड़ देती हैं ।।
ज़िक्र आते ही उनका.......
जवां मौसम की गुस्ताख़ी , सज़ा फूलों ने पाई है ।
पतझड़ में तितलियाँ भी , गुलिस्ताँ छोड़ देती हैं ।।
ज़िक्र आते ही उनका.......
हमारी जिंदगी इयूँ तो , हवाओं की बदौलत है ।
हवा आँधी जो बन जाये , झोपड़े तोड़ देती है ।।
ज़िक्र आते ही उनका.......
सुनो आवाज़ पन्ना की , बहारों फिर चली आओ ।
सुना है दिल की आवाजें , दिलों को जोड़ देती हैं ।।
ज़िक्र आते ही उनका.......
-पन्ना की कलम से