खुद की आदत खुद बीगाडते है | चलेगा / चल जाएगा / चला लेंगे पर कहां !?! ये पता नहीं |( सच हर बार एक सा दीखता है इसलिए ज्यादा महेनत नहीं रेहती पर जुठ एक को छुपाने के पीछे दुसरा, तीसरा, कर लंबी लाईन लगानी पडती है | कहां कम महेनत लगे करना वो चाहिए सीधा है पर कम लोगो को बात समझ आती है |)...ॐD
?पढाई करने बैठे की तैय कर लीया जाता ये बनना है | पर जैसे जैसे महेनत करते जाते वैसे वैसे पढ़ाई मुश्किल लगने लगती है तो कोई राह ढुंढता है पढाई को आसान बनाने की तो कोई राह ढुंढता है पढाई से बचने की एक ही बात पर दो अलग अलग राह सबके सामने होती है और अपनी पसंद चुनकर आगे बढ़ता चला जाता है और उसका परीणाम भी वैसा ही आता है | महेनत करने वाले को सफलता मीलती है और वो बाकी का जीवन आसानी से गुजार पाता है और जो आलसी या बीना महेनत की राह पर चलने वाले जीवन भर राह ढुंढते है कि कैसे बचे |...ॐD