आतिशो को हवा ना दिया करो l
जाम पे जाम यूँ ना पिया करो ll
भूल जाओ बीती बातो को सुनो l
खार दिल में रखकर ना जिया करो ll
चोट खाकर मुस्कुराते तुम रहो l
बात दिल पे यूँ ना लिया करो ll
बात कहनी है तो कह भी डालो ना l
खुलते होठ यूँ ना सिया करो ll
आदतों से जो मजबूर है सखी l
तुम जमाने से यूँ ना बिया करो ll
सखी
दर्शिता बाभभाई शाह
७-१-१९