लाख लोग कह ले कि हमारे देश के लोगो की सहन.शक्तिसमाप्त हो गयी है.लेकिन पता नहीँ क्यूँ मेरी आत्मा कुछ और कहती है। भ ई एक बात बताओ कोई भी चीज जब निरन्तर प्रयोग मे लायी जायेगी उसकी कमी तो होगी ।कितने विदेशी आक्रांताओं ने समय समय पर हमारे धैर्य की परीक्षा ली है उनके नाम जाति धर्म कुछ भी रहे हों परन्तु काम तो एक ही था ।हमारी पूरी कौम को नीचा दिखाना ' अपमानित करना आपके बच्चों को दीवार मे चुन दिया जाय मात्र इसलिए कि आप धर्म विषेश को स्वीकार नही करते ।आप हमेशा हमारी आस्धा हमारे धर्म हमारी संस्कृति पर प्रहार करेंगे और हमें विरोध करने का अवसर भी नही होगा ।हांँ थोडी सहनशीलता हमारी कम हो गयी है शायद अपने पडोसी को देखकर लेकिन सफेद नहीँ हुआ है उसकी तरह ।हम वह थे और हैं भी जिन्होंने प्रत्येक बाहर से आनेवाले मे भगवान देखा परन्तु अधिकांश शैतान ही निकले .हमें भी पारसियों की तरह पूरा विश्वास था असुरमहत् के आने का ।गलती की .अपने अन्दर के असुर महत् महसूस न करने की ।सहनशीलता और कायरता. पयार्य हो.गए. है.।