*" आगे बढाने के लिए चली चाल "*...ॐD
रचना : देखो ! तो अखबार में शर्मिला की फोटो के साथ लिखा है कि वह भड़काऊ भाषण दे रही है और लोगों को भड़का रही है | अच्छा हुआ यहां से चली गई वरना परिवार का नाम डुबो देती बहुत ही लीडर बनने का शौक था, अब भुक्तेगी |
(थोड़े दिनों बाद )
जनक : रचना ! जीस शर्मिला को तुम थोड़े दिनों पहले भला बुरा केह रही थी उसने हमारी कॉलोनी के लिए देखो क्या किया है ? अखबार में बड़े अक्षरों में उसकी तारीफ लिखी है |
रचना : अखबार देख मुझे तो पहले से ही लगता था कि उसमें कुछ बात है | आखिर हमारे परिवार का नाम रोशन किया ही | यह सब मेरी ही चाल थी बाहर निकले थोड़ा सीखे तो आगे बढ़ पाए |...ॐD