तुमने कहा था दो कदम तुम चलो जरा,
अगले मोड़ पर मिलता हूं,
भटकना मत कही,
और मै चल पड़ा,
तुमने सीधा ही रास्ता बताया था,
दो कदम ही चलना था,
पर,
मै होशियार बना,
अपना रास्ता थोड़ा छोटा करता हूं,
सोचकर,
अलग रास्ते पर चल पड़ा,
और देखो,
अभी तक मै तुम्हे ढूंढ ही रहा हूं।
अब सवाल ये है,
क्या मै तुम्हे फिर कभी ढूंढ पाऊंगा?
क्या तुम मेरा इंतजार कर रहे होगे वही,
या किसी और का हाथ थाम लिया होगा?
क्या तुम मुझे फिर मिल पाओगे।
© Krishna Katyayan 2019