Hindi Quote in Blog by SURENDRA ARORA

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हे मेरे देश के किसान



तुम कर्जदार हो उस धन के

जो शायद मेरे देश की किसी स्कीम ने तुम्हे दिया था



तुम उस कर्ज को उतार नही सके

क्योंकि तुम्हारे खेत या तुम्हारी फसल ,



मौसम के उस अनिश्चय को सहन नहीं कर सके

जो मौसम की फितरत है

यदा - कदा इस बोझ को तुम भी सह नहीं पाए

और तुमने पलायन को गले लगा लिया



तुम्हारा पलायन तुम्हारे लिए सुखद था या दुखद

इसका आकलन समय की समझ से भी बाहर निकला ।



परन्तु मेरे स्वयम्भू नियति निर्माता के लिए संजीवनी सा साबित हुआ ।

वो तुम्हारे पलायन को अपनी डूबती हुई नाव की पतवार बनाकर

फिर से तुम्हारा माझी बन बैठा ,



अब तुम्हारी सन्तत्ति फिर से वही कर्ज लेगी और उस प्रदूषित हवा से जिंदगी की भीख मांगेगी

जिसको प्रदूषित करने का षड्यंत्र ,



उसी स्वयम्भू पालक ने रचा था ।



काश कि तुम अपने पलायन से पहले

उस गंगा की पड़ताल कर लेते जो

गंगोत्री से निकलते हुए कितनी निर्मल थी पर

उसकी राह में गन्दी फितरतो के न जाने कितने गन्दे नाले इन्हीं मवालियों ने उसी गंगा में बहा दिए ।



फिर अपनी डूबती नाव के साथ

तुम्हारे कर्ज को पतवार बना

तुम्हारे हमदर्द बन कर फिर से तैर उठे ।



वो इसी तरह अपना चाक्रिक चक्र चलाते रहेंगें ।



और तुम्हारा पलायन और उसकी डूबती नाव बार - बार उठ कर तैरती रहेगी ।



तुम अपनी सन्तत्ति के रूप में बार - उस चक्र का हिस्सा बनते रहोगे ।



मेरा देश अपनी आँखे बदल - बदल कर शिथिल शैया पर लेटा सब कुछ देखता रहेगा ।



सुरेन्द्र अरोड़ा

Hindi Blog by SURENDRA ARORA : 111067322
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