हो रहा सशक्तीकरण यहां, अबला पर अत्याचार बहुत, रिश्तों की क्या बात करे हम ,संबंधों पर है धूल बहुत ।
टूटे विश्वासों के तारों में ,फिर से प्राण शक्ति भर दो ।
आत्मबोध करा दो मां!,तुमसे अनुराग बढ़ाते हैं ।
बाल वृंद अज्ञानी जन ,कर्मों से अपने भटक गए ,
भूल गए कर्तव्य ज्ञान को ,धर्म जाल में उलझ गए ।
भूले मंदिर मस्जिद के झगड़े ,समरसता इनमें भर दो।
हम दीन हीन अज्ञानी हैं तेरी शरण में आते हैं ।
हो न आतंकवाद की होली भारत के प्राणांगन में,
मानवता की धूम मचे , जन-जन के हृदयांगन में ।
मिट जाएं संताप वो सारे, जीवन में खुशियां भर दो ,
हो सद्भावों का सद् चिंतन, हम तेरी अलख जगाते हैं ।।
तारा गुप्ता