'अनजान शहर का अनजान सफ़र'
छूटा शहर,साथ आ गई यादें...
वो एक चाय की दुकान,
वो कुछ बच्चे मासूम और शैतान...
वो किसी की शरारती बातें,
किसी की प्यारी सी मुस्कान
वो छत पर अचानक लंगूरों का आना,
और मेरा डरते हुए नीचे जाना,
वो दिन-दिन भर भूखे रहना
वो किसी का रात में
अचानक साथ छोड़ना..
किसी का ठंड में कंबल देना..
एक अनजान शहर का सफ़र
कुछ सुकून कुछ Suffer...
प्रांंजल,
23/12/18,
10P