कल्पना मात्र..
आज शाम कई दिनों बाद हम दोस्तों के साथ टहलने निकले थे रास्ते में वह बगीचा आया जहां पर हम कभी किसी से मिला करते थे.
तो सोचा चलो आज यही पर टहल लेते हैं थोड़ी पुरानी यादों को फिर से ताजा कर लेते हैं. हमने बगीचे का एक चक्कर लगा लिया था कि मेरी नजर एक लड़के पर पड़ी तकरीबन उसकी उम्र 20 या 21 साल रही होगी.
वह बेंच पर अकेले बैठे हुए था ना जाने आसमान में देख कर क्या सोचे जा रहा था हम तो चल दिए आगे फिर जब हमने दूसरा चक्कर लगाया तो हमने उसे देखा की वह खामोश होकर रो रहा था.. उसकी आंखों से आंसू टपक रहे थें मुझ से रहा ना गया में उनके पास जा कर बेठा.थोड़ी हिम्मत जुटाई और उनसे पूछा कि क्या बात है क्यों रो रहे हो @जनाब..? वह थोड़ी देर खामोश रहे .
अपने आंसू पहुंचकर उन्होंने मेरे सवाल का जवाब तो नहीं दिया मगर उन्होंने मुझे कई सवाल पूछ लिए जैसे कि..
क्या कभी किसी से जुड़े हो आप..?
क्या कभी किसी और के लिए जियो हो आप..?
क्या कभी किसी की खोई हुई मुस्कान को वापस लाने की कोशिश की है आपने..?
क्या कभी किसी और के सपनों को पूरा करने की कोशिश की है आपने..?
बस फिर मैं थोड़ी देर खामोश रहा कुछ कहता उससे पहले ही मेरे दोस्तों ने मुझे आवाज़ दी और में खड़ा हो कर चलने लगा. और वैसे भी उनके इन सवालों का कोई जवाब जो ना था मेरे पास..