होंठ चुप है नयन चुप है
स्वर उदास है
हवा में बह रहा राग रंग
भी कुछ सहमा सा आज है
अफ़सोस जनक है आज की तारीख भी १६ दिसंबर
कितने बचे हैं
अभी
अधर्म ,
धोखे ,
सिर्फ और सिर्फ
धर्म के नाम पर ?
क्या कसूर था इन मासूम बच्चो का। ।कायर ,इतना जुल्म कैसे किया
@ranju bhatia...
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