यूं जिंदगी के ख्वाब दिखा गई आप,
यूं मुस्करा के अपना बना गई आप,
बहती हुई हवाओ को मानो थाम सी गई आप,
सावन में आके कोयल की आवाज़ सुना गई आप,
यूं अपने प्यार से गम को मिटा गई आप,
यूं ख्वाब में आके अपना बना गई आप,
धुल लगी किताब कें पन्ने फिर से पलट गई आप,
उस में मुरझाऐ हुए गुलाब की याद दिला गई आप,
यूं जिंदगी में फिर से प्यार की बारिश दे गई आप,
बिना आहट के इस दिल में जगह बना गई आप,
यूं फिर से मुझे जीने का मक़सद सीखा गई आप,
बिना आहट के इस दिल में जगह बना गई आप..!
मुकेश चौहान