आपके आने का इंतज़ार लगाये बेठे हे।।
यु ही भरे तुफानो में हम कश्तियो को चलाये बेठे हे।।
आप आओ तो गुलिस्तानन बन जाये।।
इसी सोच में हम अपना जहा वीरान बनाए बेठे हे।।
ज़रा गौर तो फरमाइये।।किस कदर हे आपकी मोहब्बत का फितूर।।।
आपकी तारीफे सुनाने हम लफ़्ज़ों में जज़्बात मिलाये बेठे हे।।
गुज़र जाये तेरे कानो से होकर कोई अल्फ़ाज़ हमारे।।
बस इसी उम्मीद से खुद को हम शायर बनाये बेठे हे।।।
जो तेरी हर उम्मीद पे टूट जाये हर दफा।।
हम खुद को वो आसमान का तारा बनाये बेठे हे।।
"तुम" बनकर रेह लेंगे हम तूजहि में कही।।।
हम जहा से अपनी हस्ती ही गवाये बेठे हे।।
~ANV~