*" अच्छी सोच जीवन बदल दे "*
बेटा : " मां! मैंने कल एक दीदी की FB पर POST पढ़ी तो रात भर सोच कर मैंने तैय कर लिया है | बारहवीं खत्म कर मैं तो देश सेवा ही करने वाला हुं |"
मां : "नहीं !अभी तुम्हारी उम्र ही क्या है ? तुम्हें पढ लीख अफसर बनना है | पैसे आए तब जाके देश सेवा कर पाए | ऐसा ही कुछ आएगा या चाहा होगा ना ! पर नहीं ऐसा नही कहुंगी | मैं तो कहुंगी की करो |"
बेटा : "पर कैसे वही तो समझ न आ रहा |"
मां : " देश सेवा का कार्य पहले घर से शुरु होता है |"
बेटा : " कर ली ना स्वार्थी वाली बात |"
मां : " तु पहले ध्यान से सुन ले | सुन, पहले तो तुजे बीजली, पानी की बचत करनी आनी चाहिए | तु जुते, किताबे जो यहां वहां रख देता है वो ढंग से रखनी पडेगी तेरा खुदका जीवन व्यवस्थित होगा तो दुसरो का कर पाएगा | खाने की तेरी थाली खाना खाने के बाद तुजे जहां जुठे बर्तन रखते है वहां रखनी पडेगी तो ही तु दुसरो की जुठी थाली उठा पाएगा और जो तुजे दो-तीन महीनों में नये कपड़े, जुते चाहीए होते है वो तुजे छे-सात महीने बाद खरीदने होंगे और जो तु पार्टी वगेरामे केक मुह पर लगा कर बीगाडता है उसके बदले केक ही छोटी लेकर खाने में इस्तेमाल करेगा |"
बेटा : " मां! आपने तो पहले ऐसी कभी बातें बतलाई नहीं पहले बता देती तो !"
पापा : " बेटा ! हमने भी कल रात वहीं पोस्ट पढ़ी मैं और तेरे मां ने भी पुरी रात ये सोचा है तब जाके तुझे बता पाई | अब सुन हम क्या करने वाले है | युटुब पर देखा था की पुरानी चीजों का उपयोग कर नया कुछ बनाते है | तेरी नानी ऐसी ही बचत करती थी | तेरी दादी ने भी ऐसे ही कीया है | मैंने भी तैय कीया है कि पांच-छः बार चाय पीता था वो भी अब दो वक्त ही पीऊंगा स्वास्थ्य भी अच्छा रेहता है और अब से हम धुमने भी महीने में एक बार सह परीवार जाया करेंगे और जहां जाएंगे वहां हमसे खुद से गंदगी न फैले वो ध्यान रखेंगे और एक बात तुम्हें जो दुसरो का मजाक उड़ाने की आदत है वो बंध करनी पड़ेगी तभी तो तुम उनका दु:ख दर्द समज पाओगे और वो तुम्हे अपना समजेगे |"
बेटा : " मां-पापा ! नया साल तो वाकई नया ही होगा गया |"...ॐD