आज मानवता के मसीहा , नारीमुक्तिदाता , ज्ञान के प्रतीक, विश्व रत्न , बोधिसत्व बाबा साहब डॉ भीमराव आंबेडकर के 62वें महापरिनिर्वाण दिवस पर NTPC रिहंद में प्रस्तुत मेरा गीत ......
(ऐहसान है मेरे बाबा का)
आज मेरी हस्ती है जो भी कर्ज है मेरे बाबा का ,
चमक रही बहुजन की बस्ती कर्ज मेरे बाबा का ।
इंसानों को इंशां की भाषा बाबा ने मेरे सिखलाया ,
हरिया मंत्री बन बैठा ऐहसान है मेरे बाबा का ।
मुझको उससे गिला नही है उस पर तरस मुझे आता ।
जिसने मेरे बाबा के भीतर की ज्वाला भड़काया ।।
धरती पर अपमान हुआ जब भारत भाग्य विधाता का ,
निर्बल को अधिकार दिया ऐहसान है मेरे बाबा का ।।
चाहे लम्बा तिलक लगाओ चाहे टोपी गोल धरो ,
समता की आवाज हैं बाबा लेकिन इतना ध्यान धरो ।
जो डरता है वह तोड़ रहा है मूरत मेरे बाबा की ,
फिर भी उसके जीवन पर ऐहसान है मेरे बाबा का ।।
बाभन,मुल्ला,ठाकुर,बनिया या गाँधी का हरिजन हो ,
सब जन का जो न्याय करे सम्विधान है मेरे बाबा का ।
जिल्लत की रोटी खाता जो पशुवत जीवन जीता था ,
ज्ञान के दीपक जला रहा इन्शान है मेरे बाबा का ।।
-पन्ना की कलम से