यकीन
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किसी ने दी है जगह
दिल मे उसके
यकीन हो जाना इसका
बदला माहौल तब से
दिल की दुनिया का
गमगीन हुवा करता था
जो कभी
खिला खिला सा गुलशन
हैअभी
प्यार का असर
है ही ऐसा
यकीन करो,
कुछ नही रेहता
पेहले जैसा
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कविता- यकीन
अरुण वि.देशपांडे-पुणे
9850177342
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