दीपावली का आधार
चंद दिप जले....
कुछ फूल खिले....
लोगों ने कहा...
है दीपावली |
सन्नाटा है मन में...
दिल में अंधेर है फैली. |
कोई यश मांगा...
कोई वैभव....
कोई सोने की सौगात |
मासूम बच्ची ने मां से,
मांगी सिर्फ 'भात ' |
बिवश हाथों ने
बच्ची को सहलाया....
भात तो दे ना सकी...
बस छाती से लगाया |
जन जन की सेवा करे,
कहलाये सरकार |
हाथ धरे देखा करे
जब ना हो आधार.
हे सुखों की स्वामीनी....
एक तेज दे अपने रुप का |
भोग विलास भले ना दे...
नाम मिटा दे भूख का |
एक बूंद दे अपने स्नेह का...
हो जाए यहां भी हरियाली ....
जल जाए दिप प्रेम का....
मन जाए ' वंदे ' की दीपावली...
मन जाए ' वंदे ' की दीपावली.. |