तमन्नाओ का समंदर था,
जिंदगी जीने का हुनर संग था,
खुशबू सी महकती मै थी ,
चिड़िया सी चहकती मै थी,
मुट्ठी मे बंद ख्वाबो का कारंवा था,
तारो की छांव तले रोज संवरता था,
ख्वाबो मे तुम्हारा था यू आना जाना,
उनमे तुमको जीना तुमको पाना ,
बिखर गए एहसास छलक उठी मै,
डूबकर उनमे न पार निकल सकी मै,
आज भी यादो का कारवां संग है,
पर न अब जिदंगी जीने का हुनर संग है,
अब न खुशबू सी महकती हूँ मै,
अब न चिड़िया सी चहकती हूँ मै,
पर अब भी तेरी बांहो की सीलन से महकती हूँ मै