#kavyotsav
*समय इंतज़ार करता तो*
लम्हा एक मैं लेती, बिठाती पास में अपने
बोलो तो किस पल में हैं मेरे पूरे हुए सपनें
ले ही लेती कुछ लम्हे, जो ये व्यापार करता तो
समय को रोक लेती मैं, समय इंतजार करता तो
सुबह होती है रात आती, पुनः फिर जागरण होता
हर लम्हा बदल जाता, फिर भी लम्हा वही होता
सहर को रोक लेने का कहीं आसार होता तो
समय को रोक लेती मैं, समय इंतजार करता तो
कभी खुशियाँ उठा लाते, कभी आँसू दिलाते हो
बदलते हो कैसे इतने, कहाँ से रंग लाते हो
पूछ लेती प्रश्न अपने, जो ये तैयार होता तो
समय को रोक लेती मैं समय इंतजार करता तो
मुस्कुराया, समय बोला मैं तो एक सा ही हूँ
जो भी डालोगी बीज मुझमें, वही सृजित करता हूँ
शिकायत भी नहीं होती, कदर संसार करता तो
समय को रोक लेती मैं ,समय इंतजार करता तो !!