#kavyotsav
~~प्रेम~~
अकेले बैठता हूं तो
अक्सर तुम्हारी यादें
चिडीयोंकी चहक जैसी
कान मे गुंजने लगती है।
तुम्हारा खिलखीलाता चेहरा,
जुल्फे सुलझाती नाजूक उंगलीया
ये नजारा हमेशा मुझे
तडपा देता है अकेले मे।
घर के सामनेसे गुजरते
तुझे हर रोज देखता हूं।
तब अजीब लगता है
तुम्हारा सामनेसे गुजरना।
चलती तुम हो और
मै हिल जाता हूं।
कोई जोर से हिलाता है,
तब जाके ये कंबख्त दिल
ठिकाणे आता है।
ओर मै भी उठता हूं,
तेरी यादों से भरे
भरी मैफिल से,
थोडा चिडचिडाता हुआ।
-अभिजीत जाधव.