जींदगी थी कब्र सुधी नी मुसाफरी
जींदगी भगवाने आपी छे जीवी जान मानव तारुमारु करी ने तु मतभेद करीस नहीं.... जींदगी थी कब्र सुधी नी मुसाफरी मांथी दरेके पसार थवानु होय छे......
तु सु लाव्यो तो सु लइ ने जए ,जायरे तु खाली हाथ लाव्यो
जयारे तारो देह ठंडो पडशे काम करवानु बंद करशे तारे कंइज काम नहीं लागे तारो देह मृत हशे त्यारे तारा शरीर परथी सफेद कफन पन हटावी देशे. माट जेटलु मळे छे तेने त्याग करी ने भोगव जींदगी थी कब्र सुधी नी मुसाफरी मांथी दरेके पसार थवानु होय छे........
आ मिलकत अने पैसा जायदात कोइ नी छे नही ने थवानी नथी ने छेल्ले तारो सहारो बने तारा कमँ अने सफेद कफन जे हकीकत है कि जिंदगी थी कब्र सुधी नी मुसाफरी मांथी दरेके पसार थवानु होय छे.....
जींदगी थी कब्र सुधी नी सफर आपणने घणु बधु शिखवी जाय छे. माणस माणस नी पहेचान करावे छे... जीवन थी कब्र सुधी नी मुसाफरी मांथी दरेके पसार थवानु होय छे....
आ जींदगी रुपी खेल मा मित्र पण दुश्मन बने छे पोताना पण हाथ छोडी त्यारे आ सत्य समजाय छे जींदगी थी कब्र सुधी नी मुसाफरी मांथी दरेके पसार थवानु होय छे नही...
अहींया लोको पोताना मतलब खातर तमार आगळ पाछळ फरसे तमे कोइने पोतानु मानी मदद करशो तो एज तमने रमत रमाडी जसे आ मेदान मा त्यारे माणस ने सत्य नो अहेसास थाय त्यार घणो समय विती जाय छे त्यारे माणस ने अहेसास थाय छे. जींदगी थी कब्र सुधी नी मुसाफरी मांथी दरेके पसार थवानु होय छे
पोताना काम खातर तमने कलर लगावसे ने पछी औकात देखाडसे आ दुनियां रुपी चक्रव्यूह मां ... जींदगी थी कब्र सुधी नी मुसाफरी मांथी एक ने दिवस दरेके पसार थवानु होय छे
आ हकीकत छे. जीवन रुपी चक्रव्यूह नी जे तेमा फसाय छे ते बहार निकळी सकतो नथी जेटलो बहार निकडवा जाय तेटलो अंदर उतरे छे. जींदगी थी कब्र सुधी नी मुसाफरी मांथी दरेके पसार थवानु होय छे..
जीवन जीवो पण कोइनु करी नाखवानी वृति थी नहीं कुदरत नो डर राखी... तमने न्याय तो उपर थी तोलाय छे पण जीवन थी कब्र सुधी नी मुसाफरी मांथी दरेके पसार थवानु होय छे. आ मुसाफरी घणु बधु शिखवी जाय छे मित्रो.....
ली: शैमी अेस. प्रजापति
महेसाणा
(आ मु खातरी आपु छु के आ कविता मारु मौलीक सजँन छे.... मे कोइ नी नकल करी नथी... जो कोई नी नकल पुरावार थाय तो कानुनी पगला लेवानो अधिकार छे तमने.....Shaimee )