#Kavyotsav
शीर्षक: बेटी की माँ
भाव:भावनात्मक
हा मुजे है यकीन मैं बनुगीं एक दिन एक बेटी की माँ,
गर्व होगा उस दिन जब वो पढ लिख कर रोशन करेगी मेरा नाम, मगर इस दूनिया मे लाने से डर लगता है।
उसकी गूंजती हुई किलकारियाँ कोई चीखों मे ना बदल दे,
उसकी मुस्कुराहट को कोई आंसूओं मे ना बदल दे,
इस बात से डर लगता है, हां मुजे अब बेटी की माँ बनने से डर लगता है।
जो जाने अनजाने हाथ उसे प्यार दुलार के लिए उठते थे वो कहीं उनके गंदे इरादे के लिए उठ जाए इस बात से डर लगता है,
मेरी बिटीयां जो बागों मे खेलने और तितलीयो के पीछे भागने मे मग्न हो,
कहीं कोई मेरे उस फुल को अपने पैरों तले रोंदने का इरादा ना बना ले, इसी बात के डर से मुजे बेटी की माँ बनने से डर लगता है।
कैसे सोंपु कीस हाथ पर भरोसा कर लूं हर भरोसा अब डगमगा नझर आता है,
जो लोग पहले बच्चों पर जान लुटाया करते थे, अब कैसे वो उनकी जान के प्यासे हो गऐ,
इसलिए अब हर वक्त आंचल मे छुपाकर रखना पडे इस डर से बेटी माँ बनने से डर लगता है।