मेरी बेचैनी कुछ ऐसी हे, मे लब से बयां ना कर पाऊं...
मेरे नैन मे ऐसी नमी हे, शायद तुमको दिखला पाऊं....
कुछ ख्वाब आंखो मे अधूरे लिए , तु ही बता मे कहा जाऊं...
वक्त का पैया गुमाकर के, शायद तुझको मे मिल आऊं...
कुछ बातें जो तुझसे कहनी हे, कुछ तुझसे भी मे सुन पाऊं
कुछ हाल यूंही बनाकरके , तेरे खयालों मे खो जाऊं....
इस तन्हाई के मौसम मे, पल दो पल तेरा हो जाऊं...
तेरे आने की उम्मीद तो नहि, कैसे तुझको समझा पाऊं..
है नाम तेरा जपते फिरते, तेरी खुशबू से मे महक जाऊं...
तुझे रोम-रोम मे बसा करके, सदियों मे यूंही जी जाऊं...
हे आहत जो दिन-रात सताती, उलझ रहा मेरा हर पल,
बेचैनी का ये मंज़र अब , कैसे तुझको बतला पाऊं...
आएगा तु जब पास मेरे, तेरे सिने से मे लिपत जाऊं..
मेरी बेचैनी कुछ ऐसी है, मे लब से बयां ना कर पाऊं...
मेरे नैन मे ऐसी नमी हे, शायद तुमको दिखला पाऊं...
:- आशु जोशी