बचा जो भी मुजमे वो तुझसे जुड़ा है,
ये कैसा है मंजर जो मुझसे खफा है,
ना मिलती है मंजिल ये वो रास्ता है,
कितना भी कह दो ये दिल कहां समझता है।
हरे जख्मों पर कोई मरहम लगा दे,
मरहम के वास्ते निगाहे ना मिला दे,
आसमां को जमीं से मिलवा दे,
खुदा दोबारा इश्क ना करा दे,
रांझा को तु हीर से मिलवा दे,
खुदा दोबारा इश्क ना करा दे।