रमजान - होली
रमजान के साथ होली के रंगों का आता देख वो मुस्कुराई तो जरूर होगी। आखिरकार तीस सालों में ऐसा दिन आया है जब इबादत के बीच वो अपने प्रेमी के साथ होली का उत्सव मनाएगी। अपने बेरंग जिंदगी में वो कुरान के आयते पढ़ेगी। अपने रोजेदार के गालों पर होली के रंगों से जश्न मनाएगी। और अंत में अपनी महोब्बत को वो इन दोनो मजहबों से ऊपर दिखाते हुए, वह अपने प्रेमी के आलिंगन में इफ्तार करेगी- शायद इसलिए कि हर रंग अंततः धुलकर काले में ही समा जाता है।”