Mout ki Dastak - 45 in Hindi Horror Stories by kajal jha books and stories PDF | मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 45

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 45

भूतिया हवेली का रहस्य
रांची के बाहरी इलाके में, घने जंगलों के बीच एक पुरानी हवेली खड़ी थी। लोग उसे 'काली हवेली' कहते थे। सौ साल पुरानी यह हवेली कभी एक जमींदार की संपत्ति थी, लेकिन अब वहां कोई नहीं जाता। रात के अंधेरे में दीवारों से अजीब आवाजें आतीं – कभी हंसी, कभी रोना, कभी पैरों की आहट। स्थानीय लोग कहते, "वहां भूत रहता है। जो गया, वो लौटा ही नहीं।"
मेरा नाम राहुल है। मैं रांची का एक युवा पत्रकार हूं। मेरी जिंदगी में कुछ रोमांच की कमी थी। एक दिन, अखबार के लिए एक स्पेशल स्टोरी की जरूरत पड़ी – 'रांची के भूतिया स्थलों पर रिपोर्ट'। मैंने काली हवेली को चुना। दोस्तों ने मना किया, "पागल हो क्या? मत जाओ!" लेकिन मैंने ठान लिया। रात के 10 बजे, मैं अपनी जीप लेकर हवेली के पास पहुंचा। आसमान में काले बादल छाए थे, बिजली कड़क रही थी।
हवेली का मुख्य द्वार जंग लगे लोहे का था। मैंने टॉर्च जलाई और अंदर कदम रखा। अंदर धूल और मकड़ियों के जाले हर तरफ थे। फर्श पर टूटे कांच और पुराने फर्नीचर बिखरे पड़े थे। हवा में सड़ांध की बदबू थी। मैंने कैमरा ऑन किया और रिकॉर्डिंग शुरू की। "दोस्तों, मैं काली हवेली में हूं। देखिए ये भूतिया जगह..."
अचानक, ऊपरी मंजिल से एक ठंडी हवा का झोंका आया। मेरी टॉर्च की लाइट कांप गई। "कौन है?" मैंने चिल्लाया। जवाब में सिर्फ सन्नाटा। मैं सीढ़ियों की ओर बढ़ा। सीढ़ियां चरमराती हुईं, जैसे कोई मेरे साथ चल रहा हो। ऊपर पहुंचते ही एक कमरा दिखा – बड़ा सा हॉल। बीच में एक पुराना शीशा लगा था। शीशे में मेरी परछाईं साफ दिख रही थी, लेकिन... मेरे पीछे एक औरत की परछाईं? लंबे बाल, सफेद साड़ी, चेहरा पीला।
मैं पलटा। कोई नहीं। दिल धड़क रहा था। "ये क्या था?" मैंने खुद से कहा। तभी, शीशे से आवाज आई – "राहुल... आ गया तू..." मेरी रूह कांप गई। ये मेरी आवाज कैसे जानती है? मैं भागा, लेकिन दरवाजा बंद हो चुका था। चारों तरफ अंधेरा। टॉर्च गिर गई। अब सिर्फ मोबाइल की लाइट थी।
मैंने कमरे की तलाशी ली। कोने में एक पुरानी डायरी मिली। जमींदार की पत्नी की। पन्ने पलटे तो लिखा था: "मेरा पति ने मुझे मार डाला। रात के 12 बजे, इसी हॉल में। मेरी आत्मा यहीं भटकती रहेगी। जो आएगा, वो मेरे साथ रहेगा।" तारीख – 1925। डर से पसीना छूट रहा था। तभी, दीवार पर खून से लिखा संदेश दिखा: "तू मेरा है।"
मैं चिल्लाया, "नहीं! मैं नहीं रुकूंगा!" लेकिन कमरे की लाइटें अपने आप जल गईं – पुरानी मोमबत्तियां। बीच में वह औरत खड़ी थी। लंबे काले बाल, खाली आंखें, मुंह से खून टपक रहा था। "राहुल... मेरे साथ खेल... " उसने कहा। मैं भागा, लेकिन पैर जम गए। वो मेरी ओर बढ़ी। उसके हाथों से ठंडक फैल रही थी।
अचानक, याद आया – दोस्त ने बताया था कि हवेली में एक गुप्त कमरा है। मैंने दीवार टटोली। एक ईंट हिली। दीवार खुल गई। अंदर एक छोटा सा कक्ष। बीच में एक चाबी का गुच्छा। मैंने चाबी ली और बाहर भागा। लेकिन वो भूत मेरे पीछे था। "नहीं छोड़ूंगी!" उसकी चीख गूंज रही थी।
मुख्य द्वार पर पहुंचा। चाबी लगाई, लेकिन फिट नहीं हुई। तीसरी चाबी पर खुला। बाहर निकला, लेकिन पीछे मुड़कर देखा – वो द्वार पर खड़ी मुस्कुरा रही थी। जीप स्टार्ट की और भागा। रांची पहुंचा तो सुबह हो चुकी थी। दोस्तों को बताया, सब हंस पड़े। "भ्रम था यार!"
लेकिन रात को सपना आया। वो औरत मेरे बिस्तर पर। "राहुल, तू आया ना? अब तू मेरा है।" मैं जागा, पसीने से तर। अगले दिन अखबार में स्टोरी छपी। लेकिन मेरी डायरी गायब थी। कैमरा? खाली। रिकॉर्डिंग मिट चुकी।
एक हफ्ते बाद, फिर वही सपना। अब वो कहने लगी, "कल रात 12 बजे आ। वरना तेरे दोस्त को बुला लूंगी।" डर गया। दोस्त अजय को बताया। वो हंसा, "चल, देखते हैं।" हम दोनों रात को हवेली गए। अजय का कैमरा ऑन। अंदर घुसे। वही हॉल। शीशा अब साफ था। लेकिन अचानक, अजय गायब!
"अजय!" मैं चिल्लाया। दीवार से उसकी चीख: "राहुल, भाग!" मैं दौड़ा। गुप्त कमरा खुला। लेकिन अंदर अजय था – बेहोश। उसके गले पर निशान। बाहर निकले। अजय बोला, "वो औरत... उसने मेरा गला दबाया।"
हम पुलिस गए। इंस्पेक्टर ने कहा, "काली हवेली का केस पुराना है। जमींदार ने पत्नी को जिंदा दीवार में चुनवाया। उसकी आत्मा बदला लेती है।" हमने फैसला किया – भूत को शांत करेंगे। पंडित जी को बुलाया। पूजा की। रात 12 बजे हवेली में। मंत्र फूंकते हुए, हवन किया।
अचानक, वो आई। तेज हवा, चीखें। "मेरा बदला!" पंडित जी ने तावीज फेंका। भूत चीखा और गायब। सुबह हवेली में शांति। लेकिन... मेरी जेब में वो डायरी। पन्ने पर नया लिखा: "तू मेरा है, राहुल। हमेशा।"
आज भी, रात को वो आती है। सपनों में। कभी-कभी जागते हुए। काली हवेली चली गई नहीं। वो मेरे साथ है। कौन जाने, अगली बार कौन आएगा?