Mout ki Dastak - 44 in Hindi Horror Stories by kajal jha books and stories PDF | मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 44

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मौत की दस्तक: हर पन्ने पर एक नई दहशत। - 44

पुरानी हवेली का रहस्य
मुजफ्फरपुर की गलियों से थोड़ा दूर, एक जंगल के किनारे पर खड़ी थी पुरानी ठाकुर हवेली। लोग कहते थे कि वहाँ रात को भूतों की आवाजें आती हैं। बच्चे डरते हुए उसकी कहानियाँ सुनाते, और बूढ़े चाय की चुस्कियों के बीच चेतावनी देते – "वहाँ मत जाना, वहाँ मौत बसती है।"
राहुल नाम का एक युवक, जो शहर से पढ़ाई करने आया था, इन कहानियों से प्रभावित नहीं होता था। वह एक ब्लॉगर था, जो भूत-प्रेत की कहानियाँ इकट्ठा करता और यूट्यूब पर डालता। "ये सब अंधविश्वास है," वह हँसते हुए कहता। एक रात, दोस्तों के साथ शर्त लग गई। "अगर तू हवेली में रात गुजार आए, तो हम तुझे हीरो मानेंगे।" राहुल ने चुनौती स्वीकार कर ली।
बारिश की रात थी। घने बादल आसमान को ढके हुए थे। राहुल ने अपना बैग लिया – टॉर्च, कैमरा, रिकॉर्डर और थोड़ा खाना। हवेली तक पहुँचते-पहुँचते रात के 11 बज चुके थे। दरवाजा जंग लगे ताले से बंद था, लेकिन राहुल ने उसे तोड़ दिया। अंदर कदम रखते ही सन्नाटा छा गया। हवा में ठंडक थी, मानो कोई फरिश्ता साँस ले रहा हो।
हवेली का आँगन टूटा-फूटा था। बीच में सूखी बरगद का पेड़ खड़ा था, जिसकी जड़ें दीवारों में घुस आई थीं। राहुल ने टॉर्च जलाई। दीवारों पर मकड़ी के जाले लटक रहे थे। सीढ़ियाँ चरमराती हुईं ऊपर जाती थीं। वह ऊपर चला गया। पहली मंजिल पर एक बड़ा सा कमरा था। बीच में एक पुराना चारपाई, और कोने में आइना। आइने का शीशा धुंधला था, लेकिन राहुल को लगा जैसे कोई उसमें झाँक रहा हो।
"हैलो? कोई है?" उसने पुकारा। जवाब में हवा का एक झोंका आया, और कहीं दूर से हँसी की आवाज आई। राहुल ने रिकॉर्डर ऑन किया। "ये ट्रिक हो सकती है," उसने सोचा। वह कमरे में घूमा। फर्श पर धूल जमी थी, लेकिन बीच में पैरों के निशान थे – छोटे-छोटे, बच्चे जैसे। राहुल का दिल धड़कने लगा। "शायद जानवर होंगे।"
रात के 12 बजे। घड़ी की टिक-टिक रुक गई। अचानक, चारपाई के नीचे से सरसराहट हुई। राहुल ने झुककर देखा। कुछ नहीं। लेकिन जैसे ही वह सीधा हुआ, आइने में उसकी परछाईं गायब थी। "ये कैसे?" वह चिल्लाया। कैमरा ऑन किया। रिकॉर्डिंग चल रही थी। बाहर बिजली कड़की, और कमरे में बत्ती चमकी। दीवार पर साया दिखा – एक औरत का, लंबे बालों वाला।
राहुल भागा। सीढ़ियाँ उतरते हुए पैर फिसला। नीचे आँगन में पहुँचा। बरगद के पेड़ के नीचे एक कुआँ था। कुएँ से पानी की कलकल सुनाई दी। वह झुका। अंदर अंधेरा था, लेकिन नीचे कुछ सफेद चमक रहा था। "कपड़े?" उसने सोचा। अचानक, कुएँ से हाथ निकला – ठंडा, गीला हाथ। राहुल पीछे उछला। "भागो!" उसका मन चिल्लाया। लेकिन दरवाजा बंद हो चुका था।
वह वापस ऊपर भागा। दूसरे कमरे में पहुँचा। वहाँ पुरानी तस्वीरें लगी थीं। एक तस्वीर में ठाकुर साहब और उनकी बेटी – छोटी सी लड़की, 10 साल की। लड़की के चेहरे पर उदासी। राहुल को याद आया – गाँव वाले कहते थे, 50 साल पहले ठाकुर की बेटी लापता हो गई थी। कुएँ में गिर गई थी। लोग कहते, उसकी आत्मा भटकती है।
अब आवाजें साफ सुनाई देने लगीं। "पापा... पापा..." बच्ची की कर्कश आवाज। राहुल ने कान लगाए। आवाज चारपाई के नीचे से आ रही थी। उसने हिम्मत जुटाई और झाँका। वहाँ एक गुड़िया पड़ी थी – पुरानी, फटी हुई। गुड़िया के हाथ में एक चिट्ठी। चिट्ठी पढ़ी – "मुझे कुएँ में मत डालना पापा। मैं जिंदा हूँ।"
राहुल का खून जम गया। तभी लाइट बंद। अंधेरा। टॉर्च गिर गई। हाथ-पैर ठंडे पड़ गए। कोई उसके कंधे पर हाथ रख रहा था। ठंडा, नन्हा हाथ। वह मुड़ा। सामने छोटी लड़की खड़ी थी। सफेद फ्रॉक में, बाल बिखरे, आँखें खाली। "खेलेंगे ना भैया?" उसने कहा। राहुल चिल्लाया। भागा। लेकिन हर कमरे में वही लड़की।
एक कमरे में ठाकुर साहब की डायरी मिली। पढ़ा – "मेरी बेटी रिया को बुखार था। वैद्य ने कहा, कुआँ में डुबो दो तो ठीक हो जाएगी। मैंने कर दिया। लेकिन रात को वह लौट आई। अब वह मुझे छोड़ती नहीं।"
राहुल समझ गया। ठाकुर ने अपनी बेटी को मार डाला था। आत्मा बदला ले रही थी। अब राहुल फँसा था। लड़की हँस रही थी। "तुम भी मेरे साथ रहोगे।" कुएँ की ओर घसीटने लगी। राहुल ने गुड़िया उठाई और तोड़ दी। चीख सुनाई दी। लड़की गायब हो गई।
सुबह हुई। राहुल बाहर निकला। दोस्त इंतजार कर रहे थे। "क्या हुआ भाई?" राहुल कुछ न बोला। घर पहुँचा। रिकॉर्डिंग सुनी। सब साफ – बच्ची की आवाज, हँसी, चीख। लेकिन कैमरे में कुछ नहीं। सिर्फ राहुल का चेहरा, पीला पड़ता हुआ।
उस रात से राहुल बदल गया। वह भूतों पर विश्वास करने लगा। हवेली अब भी खड़ी है। लोग कहते हैं, रात को वहाँ नन्ही हँसी सुनाई देती है। और कभी-कभी, कुएँ से हाथ निकलता है...
राहुल ने कभी वह वीडियो नहीं डाला। लेकिन गाँव में एक नई कहानी फैल गई – हवेली में एक भैया भी फँस गया था।