आईने के पीछे
पुरानी हवेलियों की अपनी एक ज़ुबान होती है। वे हवाओं के झोंकों में फुसफुसाती हैं, उनकी दीवारों की दरारें गुज़रे हुए वक्त की कहानियाँ सुनाती हैं, और उनके अंधेरे कोनों में यादें धूल बनकर जम जाती हैं। आर्यन के लिए उसका पैतृक घर किसी भूलभुलैया से कम नहीं था। शहर की आपाधापी से दूर, पहाड़ों की गोद में बसा यह घर उसके दादा-दादी की आखिरी निशानी था।
आर्यन एक लेखक था, और लेखक की सबसे बड़ी कमजोरी (या ताकत) उसकी कल्पनाशीलता होती है। वह यहाँ अपनी अगली किताब पूरी करने आया था। लेकिन उसे क्या पता था कि वह जो कहानी लिखने आया है, वह उसके सामने नहीं, बल्कि उसके पीछे—उस बड़े से आदमकद आईने के पीछे छिपी है।
रहस्यमयी आईने का मिलना
घर के स्टोर रूम की सफाई करते हुए आर्यन की नज़र एक भारी, मखमली काले कपड़े से ढकी वस्तु पर पड़ी। जब उसने उसे हटाया, तो उसकी आँखें चौंधिया गईं। वह एक विशाल आईना था, जिसका फ्रेम चांदी का बना था और उस पर अजीबोगरीब आकृतियाँ उकेरी गई थीं—बेल-बूटे, जो सांपों की तरह एक-दूसरे में उलझे हुए थे।
आर्यन ने मुस्कुराते हुए अपना अक्स (Reflection) देखा। लेकिन उसे एक अजीब सी बेचैनी महसूस हुई। आईने की सतह सामान्य कांच जैसी ठंडी नहीं, बल्कि थोड़ी गुनगुनी थी। उसने सोचा शायद धूप की वजह से ऐसा हो, लेकिन कमरा तो बिल्कुल ठंडा था।
पहली विसंगति
अगली सुबह जब आर्यन ब्रश करने के बाद उस आईने के सामने खड़ा हुआ, तो उसने कुछ गौर किया। उसने अपना दाहिना हाथ उठाया, आईने में भी हाथ उठा। लेकिन जब उसने हाथ नीचे किया, तो आईने वाले 'आर्यन' का हाथ एक सेकंड की देरी से नीचे गिरा।
आर्यन ठिठक गया। "शायद मेरी आंखों का भ्रम है," उसने खुद से कहा। लेकिन लेखक का मन अब सक्रिय हो चुका था। उसने अपनी पलकें झपकाईं, और इस बार वह पूरी तरह आश्वस्त था—आईने के अंदर की दुनिया उसकी दुनिया के साथ पूरी तरह 'सिंक' (Sync) में नहीं थी।
"क्या होता है जब अक्स, असलियत से बागी हो जाए?" — यह ख्याल आर्यन के जेहन में कौंधा।
दूसरी दुनिया का द्वार
जैसे-जैसे दिन बीतते गए, आईने की गतिविधियाँ बढ़ने लगीं। एक रात, जब पूरा घर सन्नाटे में डूबा था, आर्यन को स्टोर रूम से खुरचने की आवाज़ सुनाई दी। वह टॉर्च लेकर वहां पहुँचा।
आईने के अंदर का कमरा वही था, लेकिन वहां की रोशनी कुछ अलग थी—थोड़ी धुंधली, जैसे वहां हमेशा गोधूलि बेला (Twilight) रहती हो। उसने देखा कि आईने के अंदर वाला आर्यन अपनी मेज पर बैठा कुछ लिख रहा था। जबकि असल दुनिया में आर्यन खड़ा होकर उसे देख रहा था!
आर्यन ने धीरे से अपना हाथ आईने की सतह पर रखा। इस बार कांच कड़ा नहीं था। उसकी उंगलियां कांच के अंदर ऐसे धंस गईं जैसे वह पानी हो। एक ठंडी लहर उसके पूरे शरीर में दौड़ गई। कौतूहल और डर के बीच झूलते हुए, आर्यन ने एक गहरा कदम आगे बढ़ाया और वह आईने के 'उस पार' चला गया।
आईने के पीछे का सच
आईने के पीछे की दुनिया बिल्कुल वैसी ही थी, फिर भी सब कुछ उल्टा था। वहां लिखी हुई किताबें उल्टी थीं, घड़ी की सुइयां उल्टी दिशा में घूम रही थीं। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात वह 'दूसरा आर्यन' था।
वह दूसरा आर्यन खड़ा हुआ। उसकी आँखों में एक अजीब सी उदासी और गहराई थी। उसने बिना डरे कहा, "तुम आखिर आ ही गए।"
आर्यन हक्का-बक्का रह गया। "तुम कौन हो? और यह जगह क्या है?"
उसने जवाब दिया, "मैं तुम्हारा वह हिस्सा हूँ जिसे तुमने दुनिया को दिखाने से मना कर दिया। यह आईने के पीछे की दुनिया 'छवि' (Image) की नहीं, बल्कि 'अधूरेपन' (Incompleteness) की है। यहाँ वो सब रहता है जो तुम नहीं बन पाए, या वो शब्द जो तुमने कभी नहीं कहे।"
छायाओं का शहर
उस दूसरे आर्यन ने उसे खिड़की के बाहर दिखाया। वहां एक पूरा शहर था, जो बिल्कुल उसके अपने शहर जैसा था, लेकिन वहां रंग गायब थे। वहां लोग घूम रहे थे, लेकिन वे सब 'अक्स' थे।
अधूरे सपने: वहां वे लोग थे जिन्होंने अपने जुनून को छोड़कर सुरक्षित नौकरियां चुनी थीं।
दबे हुए जज्बात: वहां वे प्रेमी थे जिन्होंने कभी अपनी मोहब्बत का इजहार नहीं किया।
छुपाई गई हकीकत: वहां वे सच थे जो डर के मारे कभी बोले नहीं गए।
आर्यन को समझ आया कि यह कोई डरावनी जगह नहीं, बल्कि एक विशाल संग्रहालय था—इंसानी पछतावे का संग्रहालय।
वापसी की छटपटाहट
"तुम्हें यहाँ रुकना होगा," दूसरे आर्यन ने ठंडे स्वर में कहा। "अब मेरी बारी है उस तरफ जाने की, जहाँ सूरज उगता है और जहाँ चीजें 'हकीकत' कहलाती हैं। मैं थक गया हूँ इस छाया वाली जिंदगी से।"
आर्यन को अपनी गलती का अहसास हुआ। उसने उस दुनिया के आकर्षण में अपनी वास्तविकता को दांव पर लगा दिया था। जैसे ही 'अक्स' ने आईने की सतह से बाहर निकलने की कोशिश की, असल दुनिया का आर्यन चिल्लाया, "नहीं! तुम मेरा जीवन नहीं जी सकते। मेरी गलतियां और मेरी नाकामियां भी मेरी अपनी हैं, मैं उन्हें किसी और को नहीं सौंप सकता!"
दोनों के बीच एक मानसिक संघर्ष शुरू हुआ। आईने की सतह एक हिंसक लहर की तरह कांपने लगी। आर्यन ने अपनी पूरी ताकत बटोरी और अपने 'अक्स' को पीछे धकेलते हुए खुद को बाहर की तरफ झोंक दिया।
निष्कर्ष: हकीकत का मोल
एक ज़ोरदार धमाके के साथ आईना चकनाचूर हो गया। कांच के हज़ारों टुकड़े फर्श पर बिखर गए। आर्यन ज़मीन पर हांफ रहा था। उसके हाथ से खून बह रहा था—एक छोटा सा कांच का टुकड़ा उसे चुभ गया था।
उसने बिखरे हुए कांच के टुकड़ों में अपना चेहरा देखा। अब वहां कोई देरी नहीं थी। जो वह कर रहा था, वही कांच के टुकड़ों में दिख रहा था। वह अकेला था, लेकिन वह 'पूर्ण' था।
आर्यन ने समझ लिया था कि हम अक्सर आईने के सामने खड़े होकर सिर्फ अपनी खूबियां ढूंढते हैं या अपनी कमियों को ढंकने की कोशिश करते हैं। लेकिन आईने के पीछे एक ऐसी दुनिया होती है जो हमारे पछतावों से बनी होती है। अगर हम अपनी वास्तविकता को पूरी तरह स्वीकार नहीं करते, तो हम भी अपनी ही जिंदगी में एक 'अक्स' बनकर रह जाते हैं।
उसने कलम उठाई और अपनी किताब का पहला पन्ना लिखा: "आईने हमें वह नहीं दिखाते जो हम हैं, बल्कि वह दिखाते हैं जो हम देखना चाहते हैं। असली सच तो आईने के पीछे छिपी हुई उन छायाओं में है, जिन्हें अपनाने का साहस बहुत कम लोगों में होता है।"