भुतिया हवेली की कहानी
प्रस्तावना
बिहार के एक छोटे से गाँव में एक पुरानी हवेली थी। लोग उसे "काली हवेली" कहते थे। कहते हैं कि वहाँ रात को अजीब आवाज़ें आती थीं—कभी किसी औरत की चीख, कभी बच्चों के रोने की आवाज़। गाँव वाले दिन में भी उस हवेली के पास जाने से डरते थे।
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हवेली का इतिहास
कहा जाता है कि यह हवेली लगभग सौ साल पहले राजा हरिनारायण सिंह ने बनवाई थी। राजा बहुत अमीर था, लेकिन उसका स्वभाव क्रूर और निर्दयी था। हवेली में उसने अपनी रानी और नौकरों के साथ रहना शुरू किया।
एक रात अचानक रानी की मौत हो गई। लोग कहते हैं कि राजा ने ही उसे मार दिया था। उसके बाद से हवेली में अजीब घटनाएँ होने लगीं। नौकर गायब होने लगे, और जो बचते, वे कहते कि रानी की आत्मा हवेली में भटकती है।
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गाँव वालों का डर
गाँव के लोग हवेली से दूर रहते। बच्चों को सख़्त मना था कि वे वहाँ खेलने न जाएँ। लेकिन डर के बावजूद हवेली की कहानियाँ हर घर में सुनाई जाती थीं।
कहा जाता था कि जो भी हवेली में रात गुज़ारता, वह कभी वापस नहीं आता।
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कहानी की शुरुआत
रवि नाम का एक युवक था, जो शहर से गाँव आया था। उसे भूत-प्रेतों पर विश्वास नहीं था। उसने गाँव वालों की बातें सुनीं और हँसते हुए कहा,
“ये सब अंधविश्वास है। मैं आज रात हवेली में रहूँगा और साबित कर दूँगा कि वहाँ कुछ नहीं है।”
गाँव वाले उसे रोकते रहे, लेकिन रवि ने उनकी बात नहीं मानी।
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हवेली में प्रवेश
रात के दस बजे रवि टॉर्च और कैमरा लेकर हवेली में गया। हवेली का दरवाज़ा टूटा हुआ था। अंदर घुप्प अंधेरा था। दीवारों पर जाले और धूल जमी थी।
जैसे ही वह अंदर गया, उसे लगा कि कोई उसके पीछे चल रहा है। उसने मुड़कर देखा—कोई नहीं था।
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अजीब घटनाएँ
- अचानक टॉर्च बंद हो गई।
- हवेली की दीवारों से फुसफुसाहट सुनाई देने लगी।
- एक कमरे में उसे लगा कि कोई औरत खड़ी है, सफेद साड़ी में।
रवि ने कैमरा निकाला और तस्वीर लेने की कोशिश की। लेकिन कैमरे में सिर्फ धुंधली परछाई आई।
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रानी की आत्मा
आधी रात को रवि हवेली के सबसे बड़े कमरे में पहुँचा। वहाँ एक पुराना आईना रखा था। उसने जैसे ही उसमें देखा, उसे अपनी परछाई नहीं दिखी। बल्कि उसमें एक औरत दिखाई दी—लंबे बाल, लाल आँखें और खून से सनी साड़ी।
वह औरत धीरे-धीरे मुस्कुराने लगी और बोली,
“तुम्हें यहाँ नहीं आना चाहिए था…”
रवि डर के मारे पीछे हट गया। लेकिन दरवाज़ा अपने आप बंद हो गया।
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हवेली का रहस्य
रानी की आत्मा ने बताया कि राजा ने उसे ज़हर देकर मार दिया था। उसकी आत्मा बदला लेने के लिए हवेली में कैद है। जो भी हवेली में आता है, उसे वह अपने साथ बाँध लेती है।
रवि ने भागने की कोशिश की, लेकिन हर दरवाज़ा बंद था। हवेली जैसे उसे निगल रही थी।
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अंत
सुबह गाँव वाले हवेली के बाहर पहुँचे। दरवाज़ा खुला था, लेकिन रवि कहीं नहीं था। सिर्फ उसका कैमरा ज़मीन पर पड़ा था। कैमरे में आख़िरी तस्वीर वही थी—लाल आँखों वाली औरत, जो मुस्कुरा रही थी।
गाँव वालों ने कैमरा देखा और समझ गए कि हवेली ने एक और शिकार कर लिया।
उसके बाद से कोई भी हवेली के पास जाने की हिम्मत नहीं करता।
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निष्कर्ष
काली हवेली आज भी खड़ी है। लोग कहते हैं कि रात को वहाँ से किसी के हँसने की आवाज़ आती है। शायद वह रानी है, जो अपने अगले शिकार का इंतज़ार कर रही है।