Dil ne jise chaha - 26 in Hindi Love Stories by R B Chavda books and stories PDF | दिल ने जिसे चाहा - 26

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दिल ने जिसे चाहा - 26

मयुर सर…
एक ऐसा नाम जिसे सुनकर अस्पताल के लोग सम्मान से खड़े हो जाते थे।
अब वे देश के जाने-माने Cardiologist थे—
दिलों की धड़कनों को ठीक करना उनका रोज़ का काम था।

लेकिन अंदर…
उनका अपना दिल पाँच साल से उसी एक जगह रुका हुआ था
जहाँ किसी शाम रुशाली ने उन्हें बिना बोले अलविदा कहा था।

बाहर की दुनिया को दिखता था—
“Dr. Mayur, calm, composed, always in white.”

पर कोई नहीं जानता था कि
उन्होंने सफेद पहनना कब, किसके लिए शुरू किया था।
रुशाली को सफेद रंग पसंद था।
वो हँसकर कहती थी—
“sir , you look good in white color & it's my favourite color too… perfect!”

और जब से वो गई,
बस रंगों का मतलब जैसे खो गया।
सफेद रंग… एकमात्र चीज़ थी
जिससे उनको रुशाली की याद आती थी
और उसी में वो ज़िंदा भी रहती थी।

सबको लगता है मयूर सर आगे बढ़ गए, उन्होंने रुशाली को भुला दिया…
लेकिन असल में वो कैसे बताएं कि वो भूल ही नहीं पाए।

वो कैसे बताएं—

कि उन्होंने अभी तक
उस चाबी को संभाल कर रखा है
जिससे रुशाली उनका ऑफिस खोला करती थी…

कि उन्होंने आज तक
WhatsApp DP नहीं बदला
क्योंकि उनकी dp वाली वो फोटो रुशाली को बहुत पसंद थी…

कि किसी भी कॉरिडोर में कोई दुपट्टा दिखता है
तो उनका दिल एक पल के लिए रुक जाता है…

कि किसी भी लड़की का “सर…” सुनना
उन्हें एक सेकंड के लिए उसी आवाज़ में ले जाता है
जिसे सुने पाँच साल हो गए। 

लोगों को लगा—
“वो आगे बढ़ गए होंगे।”
पर असलियत थी—
वो वहीं ठहरे हुए थे
जहाँ वो दोनों बिछड़े थे।

वो आखिरी मुलाकात की बातें...

“Rushali…अगले हफ्ते मेरी सगाई है.”

बस एक वाक्य।
और उसी वाक्य ने
रुशाली के भीतर की हर उम्मीद तोड़ दी।

फिर भी उसने मुस्कुराने की कोशिश की—
“Congrats Sir… मेरी यह ही ख्वाहिश है आप हमेशा खुश रहो.”

उसने मयूर सर की दी हुई घड़ी को बहुत संभालकर रखा…
और उसी शाम
वो चुपचाप शहर छोड़कर चली गई।

बिना कुछ बताए,
बिना मुड़े,
क्योंकि वो जानती थी—
मयूर सर का परिवार उनका सबकुछ था।
और वो उनके रास्ते नहीं बदल सकती थी।

जिस दिन पता चला—
“Rushali is now a District Magistrate.”

उस दिन मयुर सर पहली बार
पाँच साल बाद
बेइंतेहा खुश हुए।

हाथ में न्यूज की फाइल थी,
और दिल में अजीब-सी गर्माहट।

उन्होंने आंखें बंद की थीं…
और उनके होंठों पर एक बहुत हल्की मुस्कान आई—

“She did it… the girl who used to doubt herself… she really did it.”

उस रात उन्होंने खाना भी ठीक से नहीं खाया।
दिमाग में बस एक ही आवाज़ घूमती रही—
उसकी हंसी।
उसका बोलने का तरीका।
उसका वो बचपना कि
“सर, मैं DM बन पाऊंगी क्या?”

उन्होंने हजार बार कहा था—
“तुम DM बनोगी। और पूरी दुनिया उसे देखेगी।”

और आज…
वो सच में वहां पहुंच गई थी।

उनका दिल गर्व से भर गया।
सच में।

पर उसी खुशी के साथ
एक कसक भी आई—
“क्या अब उससे मिलना ठीक होगा?
शायद वो आगे बढ़ चुकी होगी…
और शायद उसका मेरे लिए ठहरना बेवकूफी है।”

और उन्होंने उसी दिन तय कर लिया—
वो नहीं मिलेंगे।

अस्पताल के केबिन में
मयुर सर मरीज की रिपोर्ट पढ़ रहे थे
जब दरवाज़ा खुला

कुनाल आज फिर मयूर के केबिन में घुस आया—बिना खटखटाए, जैसे हमेशा करता था।
मयूर सर फाइल में सिर झुकाए बैठे थे, पर आँखों के नीचे थकान का साया साफ़ दिख रहा था।

कुनाल:
“विवान की शादी है अगले महीने… और तुम्हें चलना ही पड़ेगा।”

मयूर सर ने हल्की मुस्कान लाई, वो वाली जो थकान छुपाने के लिए लाई जाती है।
“कुनाल… तुम जानते हो न, मैं ऐसी जगहों में नहीं जाता अब।”

कुनाल ने कुर्सी खींचकर उनके सामने बैठते हुए कहा—
“जानता हूँ। पर अब बहाने मत बनाओ। पाँच साल हो गए यार… दुनिया बदल गई… तुम भी बदलो।”

मयूर ने नजरें फाइल पर टिकाए रखीं, पर दिल कहीं और भाग रहा था—
उसी नाम की तरफ… जिसे वो वर्षों में भी भूल नहीं पाए।

कुनाल उनकी चुप्पी पढ़ चुका था।
उसने धीरे से कहा—

“देखो… इस शादी में कोई आने वाला है।
और मेरा दिल कहता है, तुम उसे देखोगे तो तुम्हारी पाँच साल से खोई हुई मुस्कान वापस आ जाएगी।”

मयूर की उंगलियाँ हल्का-सा कांप गईं।
“कौन?”
आवाज़ almost फुसफुसाहट थी—जैसे खुदको भी नहीं पता था कि वो जवाब सुनना चाहते हैं या नहीं।

कुनाल ने शरारती लेकिन रहस्यमयी मुस्कान दी—
“ये तो शादी वाले दिन ही पता चलेगा।
बस इतना समझ लो… तुम्हें वहाँ न जाने देने का सवाल ही नहीं उठता।”

मयूर ने फिर पूछा—धीरे, बहुत धीरे—
“क्या… मैं उसे जानता हूँ?”

कुनाल ने सिर्फ एक बात कही—

“कभी बहुत करीब से जानते थे।”

और कमरे में एक लम्बी, भारी, साँस रोक देने वाली खामोशी छा गई।
मयूर ने आगे कोई सवाल नहीं किया—
शायद डर था…
शायद उम्मीद थी…
शायद दोनों।

कुनाल उठते हुए बोला—

“तैयार रहना। मैं खुद लेने आऊँगा।
और चाहो या न चाहो… तुम उस शादी में जाओगे ही।”

दरवाज़ा बंद हुआ।
और मयूर उस खामोशी में बैठे रह गए—
दिल में एक अनकहा सवाल…
कि क्या सच में… कोई वो इंसान आने वाला है
जिसे वो पाँच साल में भी भूल नहीं पाए?

To be continued......