Balatkar ki saja sirf Mout - 9 in Hindi Thriller by S G Murthy books and stories PDF | बलात्कार की सजा सिर्फ मौत - भाग 9

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बलात्कार की सजा सिर्फ मौत - भाग 9

इस घटना के तीन माह बाद .....

रायगढ़ा का बदनाम, पर सबसे चर्चित इलाका — सुंदर नगर।रायगढ़ा का फेमस रेड लाइट एरिया पूरे रायगढ़ा में फैमस है देह व्यापार केलिए। रात 10 बजे जैसे ही घड़ी बजती, सड़कें जगमगाने लगती। सड़क किनारे दोनों तरफ़ — हर 20–25 मीटर की दूरी पर सजी-धजी लड़कियां खड़ी होकर , ग्राहकों का इंतजार करती और ग्राहक के आते ही वे उन्हें अपनी ओर आकर्षित करने जा प्रयास करती।  

सुंदर नगर में देह व्यापार का धंधा पिछले कई सालों से पुलिस की जानकारी में लगातार चलता आ रहा है। कॉलेज की कई लड़कियां पार्ट-टाइम इस धंधे में उतर चुकी थीं। यह बात सभी को मालूम थी, पर कोई रोक टोक नहीं।

सड़क पर खड़ी तीन चार लड़कियों को छोड़ कर बाकी कुछ लड़कियां एक दूसरे को जानती थी, क्योंकि वे रोज और लगातार आती थी। बाकी सब लड़कियां नई और कभी कभी आने वाली थी। 

कारें आतीं… मनचले अपने मन पसन्द और बजट के हिसाब से आते, सड़क किनारे खड़े लड़कियों से बात करते और अपने साथ ले कर चले जाते। जिनके पास कार नहीं होता वे लड़कियों से बात करके सुंदर नगर मोहल्ले में जो इस सड़क से थोड़ा अंदर की ओर है, वहां ले जाते, जहां सस्ते में एक घंटे के लिए बेडरूम मिल जाता हैं जहां युवक अपनी हवस बुझा कर चले जाते है।  

रात के लगभग 10:05 बजे। एक नई, बेहद खूबसूरत जवान, बेहतरीन बॉडी फिगर के साथ युवती सड़क किनारे चलती हुई आती है और वहां खड़ी हो जाती है— लाल लिपस्टिक, हाई-हील, बदन से चिपका टॉप, शॉल… उसकी उपस्थिति देखते ही सामने की तीन-चार लड़कियां भी एक-दूसरे की ओर देखने लगती हैं।

युवती खामोश खड़ी रहती है। दो-तीन कारें उसके पास रुकती हैं… कुछ बातचीत भी होती है… पर वह हर बार मना कर देती है। वह शायद किसी खास आदमी का इंतजार कर रही थी।

करीब दो घंटे खड़े रहने के बाद, काफी दूर में खड़ी एक कार धीरे धीरे उसके नजदीक आ कर खड़ी हो जाती है। ड्राइविंग सीट पर बैठे युवक को देखकर युवती बिना कुछ बोले पीछे की सीट में आकर बैठ जाती है। कार आगे बढ़ जाती है।

पीछे बैठी युवती, ड्राइविंग सीट पर बैठे युवक की ओर देखकर कहती है, “विशाल!… साला आज भी वो नहीं आया।”

विशाल कार चलाते हुए : "रीना, मेरी मेरी खबर पक्की है, भावेश सफ्ताह में एक या दो बार यहां जरूर आता है, तुम टेंशन मत लो"

रीना परेशानी भरी लहजे में, "मुझे कोई टेंशन नहीं, है मैं तो भावेश के लिए पूरे महीने आ कर इंतजार कर लूं, पर मुझे एक बात खराब लगती है, जब मैं खड़ी रहती हूं तो मेरे रूप को देखकर लड़के जो कॉमेंट्स करते हैं, वो सहन नहीं होता"

विशाल हल्की हंसी दबाते हुए “अरे, वे यहां तुम्हें प्रॉस्टिट्यूट समझकर ही बात करते हैं — ‘कितना लेगी? चलेगी क्या?’
और वैसे, इस रूप में तुम बहुत जच रही हो (बोल कर विशाल अपनी हंसी रोक नहीं)।”

रीना (नाक सिकोड़कर): “हाँ हाँ, "हंस लो..... तुम भी हंस लो।”

विशाल कहता है, "रीना यही वो जगह है, जहां से उसका पीछा किया जा सकता है.... यहां वो आयेगा जरूर... हमें धैर्य रखना होगा" 

रीना कोई जवाब नहीं देती सिर्फ, "हूं" बोलकर सिर हिला देती है। दोनों इसी प्रकार की बातें करते हुए रीना के घर पहुंच जाते हैं, रात ज्यादा हो गई थी,  विशाल रीना को उतार कर अपने घर चला जाता है।

तीन रात बीत जाते हैं, रीना इसी प्रकार रोज सज धज कर आती। दो घंटे इंतजार करके, मनचले युवकों को झेलते, नजर अंदाज करते हुए खड़ी रहती। फिर बाद में भावेश के नहीं आने पर विशाल कार लेकर आ जाता और दोनों वहां से निकल जाते हैं.... यही रूटीन बना हुआ था.... तीन रात।


भावेश के घर में माता पिता के अलावा, दो छोटे भाई और थे, पिता, पेपर मिल में काम करते थे ।

भावेश, साबुन फैक्ट्री में फोरमैन का काम करता था , विशाल उसके फैक्ट्री के कुछ सहकर्मियों को जानता था, विशाल के पापा का ट्रांसपोर्ट बिजनेस में होने से रायगढ़ा के बुहुत सारे कंपनियों में विशाल की अच्छी जान पहचान थी, उन्हीं से भावेश के बारे में ये जानकारी मिली थी की, वह किस्म का व्यक्ति था, रेड लाइट एरिया में हर सफ्ताह जाया करता था । 

इसी कारण से रीना और विशाल ने प्रॉस्टिट्यूट बनने का प्लान किया था।

आज चौथा दिन था, रोज की तरह तैयार होकर अपने समय में आ कर रीना खड़ी हो जाती है, और भावेश का इंतजार करने लगती है।

आधा घंटे बाद, एक i10 कार आकर रुकती है। ड्राइवर सीट पर भावेश था। भावेश कार से उतर कर रीना के बगल में खड़ी युवती से बात करता रहता है। भावेश को देख कर रीना के चेहरे में चमक आ जाती है।

उस युवती से बात करने के दौरान भावेश की नजर अचानक रीना पर पड़ती है, भावेश उस युवती से हट कर रीना के नजदीक आ जाता है।

भावेश वासना भरी नजरों से रीना की आंखों में झांकते हुए, कहता है, "और जानेमन, नई हो? बहुत मस्त दिख रही हो, चलोगी?

रीना पहले तो घबरा जाती है और फिर साहस जुटाकर, अपनी आँखें मटकाते हुए मुस्कुराते हुए बोलती है, "हां, चलने के लिए तो खड़े हैं" 

भावेश का शायद रीना पर मन आ गया था, पूछता है, "क्या लोगी? 

रीना हाथ का पंजा दिखाती है (अर्थात 5 हजार)।

भावेश हंस देता है, "रेट ज्यादा है यार!" 
भावेश फिर तीन ऊंगली का इशारा करता है : "इतना दूंगा?"

रीना तुरंत मान लेती है "ठीक है" कहकर कार के नजदीक आ जाती है। भावेश कार को अनलॉक कर देता है, रीना डोर खींचकर पीछे शीट पर बैठ जाती है।

रीना मिरर में भावेश की ओर देखकर, "कहां, ले जाओगे? घर, होटल?"

भावेश अपनी नजरे मिरर की ओर करते हुए, "अरे कहां लगा रखी हो.....घर -होटल! .... अपन सीधे जंगल तरफ चलते हैं, वहीं कार रोककर.....

रीना सहमत होते हुए, "अच्छा, ठीक है, आपकी जैसे मर्जी .... वैसे आप बहुत स्मार्ट लगते हो, क्या मैं नाम पूछ सकती हूं?

भावेश अपना नाम बता कर पूछता है, "तुम इतनी सुंदर हो, अच्छे परिवार की लग रही हो, इस धंधे में कैसे आ गई?"

रीना अफसोस जताते हुए, "पैसे के लिए साहब! पैसे के लिए....पैसा ही सब कुछ करवाता है"

भावेश, "सिर्फ यही काम करते हो की, इसके अलावा कहीं जॉब भी करती हो?

रीना मन ही मन खुश हो रही थी कि चार दिन इंतजार करने के बाद, आखिर मछली कांटे में फंस ही गई, वह टाइम पास के लिए भावेश से बात कर रही थी। 

रीना जवाब देती है, "जॉब भी करती हूं साहब! एलआईसी में असिस्टेंट अकाउंटेंट हूं" 

भावेश, "गुड! 

रीना, "साहब! आप शादीशुदा हो या बैचलर?

भावेश हंसता है, : "बैचलर हूं, घर में बीवी होती तो यहां क्यों आता?

रीना खुल चुकी थी वह निडर होकर कहती है, "नहीं ऐसा कुछ नही है, मेरे पास शादीशुदा मर्द ही ज्यादा आते हैं" 

भावेश, "हां, कुछ मर्दों को अलग अलग स्वाद चखने की आदत होती है, शायद मैं भी शादी के बाद वैसा ही हो जाऊं?" 

रीना जोर से हंसने लगती है, "खैर! मुझे तुमसे एक बात कहनी थी कि जब पैसा खर्च कर ही रहे हो तो मजा भी अच्छे से और आराम से लो"

भावेश मिरर में रीना का चेहरा देखकर पूछता है, "तुम्हारे कहने का मतलब क्या है?"

रीना मुस्कुराते हुए: "मैं, कह रही थी कि कार में करने के बजाय, मेरे दोस्त का फॉर्म हाउस यहीं नजदीक में है और खाली भी है वहां कोई नहीं रहता, मेरे पास उसकी एक चाबी है, यदि चाहो तो वहां मेरे साथ रात बिता सकते हो, बाद में खुशी से तीन हजार के अलावा अतिरिक्त जो भी देना होगा दे देना" 

भावेश एक क्षण सोचकर बोलता है, "वैसे आडिया बुरा नहीं है, पर मैं रात भर नहीं रह पाऊंगा, मुझे किसी भी हाल में 12 से 1 बजे की बीच घर जाना जरूरी है, नहीं तो घर वाले परेशान हो जाते हैं"

रीना खुश होते हुए कहती है, "ठीक है, मैं सुबह तक वहीं रह जाऊंगी आपको जब निकलना हो निकल जाना"

भावेश मान जाता है, "ठीक है, चलो..... मुझे रास्ता बताते जाना"

रीना तुरंत बोलती है, "थोड़ी दूर जा कर लेफ्ट मोड़ लेना"

भावेश "ठीक है" कहता हुआ कार की स्पीड बढ़ा देता है, जैसे उसे जल्दी हो। 

रीना भी खुश हो जाती है, की भावेश को फॉर्म हाउस ले जाने का प्लान सक्सेस होने जा रहा था। 

भावेश के कार पीछे लगभग आधा किलोमीटर दूर एक और कार उन्हें फ़ॉलो कर रही थी, जिसे विशाल ड्राइव कर रहा था ...... 


क्या प्लान है रीना और विशाल का? फार्म हाउस पर क्या होने वाला है? और भावेश के साथ क्या होने वाला है?