Dil ne jise Chaha - 3 in Hindi Love Stories by R B Chavda books and stories PDF | दिल ने जिसे चाहा - 3

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दिल ने जिसे चाहा - 3

रुशाली की ज़िंदगी ठीक-ठाक चल रही थी। वह एक खुशमिजाज लड़की थी, जिसे अब तक न तो किसी से प्यार हुआ था और न ही कोई उसे पसंद करता था। उसने कभी नहीं सोचा था कि उसकी ज़िंदगी में जो होने वाला है, वह उसकी पूरी दुनिया बदल देगा।

कुछ दिनों बाद ही एक घटना घटी जिसने उसकी खुशहाल ज़िंदगी में तूफान ला दिया। उसके पापा की तबीयत अचानक खराब होने लगी। घर में सभी परेशान थे। डॉक्टर से दिखाने पर भी कोई राहत नहीं मिली, और कुछ ही हफ्तों में उसके पापा का निधन हो गया। यह खबर उसके लिए किसी सदमे से कम नहीं थी। उसकी पूरी दुनिया जैसे उजड़ गई। वह अंदर ही अंदर टूट चुकी थी। वह जो हमेशा हंसती-खेलती रहती थी, अब चुपचाप रहने लगी। यह दुख इतना गहरा था कि उसे समझ नहीं आ रहा था कि इससे कैसे उबरा जाए।

परिस्थितियाँ जैसे उसके धैर्य की परीक्षा ले रही थीं। अभी उसके पापा के जाने का दुख कम भी नहीं हुआ था कि उसकी मां की तबीयत भी बिगड़ने लगी। अब तो जैसे रुशाली के ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। वह अपनी दादी के साथ अपनी मां को पास के अस्पताल ले गई। डॉक्टर ने कुछ टेस्ट करवाने को कहा और रिपोर्ट के आधार पर अगले दिन फिर आने को कहा।

उस शाम रुशाली पास की लैब में जाकर अपनी मां के  टेस्ट करवाकर आई। अगली सुबह वह फिर अस्पताल पहुंची। डॉक्टर ने रिपोर्ट देखते ही गंभीर चेहरा बना लिया। उन्होंने बताया कि उसकी मां को एक गंभीर बीमारी हो गई है और उनका इलाज बड़े शहर के किसी बड़े अस्पताल में ही संभव है। यह सुनकर रुशाली का दिल कांप गया। एक हफ्ते पहले उसने अपने पापा को खो दिया था और अब उसकी मां की हालत भी गंभीर थी। उसे लगने लगा था कि कहीं वह अपनी मां को भी न खो दे। लेकिन वह हार मानने वालों में से नहीं थी। वह अंदर से कितनी भी टूटी हुई हो, पर अपनी मां के सामने उसने खुद को मजबूत बनाए रखा।

अभी उसकी मां को उसी अस्पताल में एक दिन के लिए भर्ती किया गया। उन्हें ग्लूकोज चढ़ाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने साफ कहा कि उन्हें जल्द से जल्द बड़े शहर के अस्पताल ले जाना होगा। अब समस्या थी वहां तक पहुंचने की। रुशाली ने अपने पापा के एक पुराने दोस्त से मदद मांगी। उन्होंने उसकी मदद करते हुए एक एंबुलेंस का इंतजाम करवाया।

दोपहर को एंबुलेंस में बैठकर वे बड़े शहर की ओर निकल पड़े। उसकी मां को स्ट्रेचर पर लिटाया गया, और वह खुद उनके पास बैठ गई। रास्तेभर रुशाली अपने आंसू रोकने की कोशिश करती रही, लेकिन वह अंदर ही अंदर घबराई हुई थी। एक हफ्ते पहले उसने अपने पिता को खो दिया था, और अब उसे डर था कि कहीं उसकी मां भी उसे छोड़कर न चली जाए। इस डर ने उसे अंदर तक हिला दिया था। लेकिन वह अपनी मां के सामने कमजोर नहीं पड़ना चाहती थी, इसलिए चुपचाप अपनी भावनाओं को दबाए बैठी रही।

एंबुलेंस जैसे-जैसे आगे बढ़ रही थी, वैसे-वैसे उसका दिल तेजी से धड़क रहा था। आखिरकार, वे शाम को बड़े शहर के एक मशहूर अस्पताल पहुंचे। वहां उसकी मां को तुरंत इमरजेंसी में ले जाया गया। अस्पताल का माहौल पूरी तरह से अलग था—भीड़भाड़, डॉक्टरों की भागदौड़, मरीजों की कराहटें और रोते-बिलखते परिजन।

रुशाली को अस्पताल के बाहर ही रुकना पड़ा, क्योंकि वहां मरीज के साथ सिर्फ एक या दो परिजनों को ही जाने की अनुमति थी। उसकी मां के साथ उसके चाचा और नानी अंदर चले गए, जबकि वह अपनी दादी के साथ अस्पताल के गेट के पास बैठ गई। समय जैसे थम सा गया था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि उसकी ज़िंदगी में इतनी मुश्किलें क्यों आ रही हैं।

रात के करीब 2:30 बजे उसके चाचा बाहर आए और उसे अंदर बुलाया। वह घबराई हुई अंदर गई तो देखा कि उसकी मां एक लंबी लाइन में अपनी रिपोर्ट के लिए इंतजार कर रही थीं। वह उनके पास जाकर खड़ी हो गई। कुछ देर बाद, डॉक्टरों ने उन्हें जनरल वार्ड में भर्ती कर लिया और खून की बोतल चढ़ाने की प्रक्रिया शुरू की।

रुशाली अपनी मां के बगल में बैठ गई। उसने अपनी मां का हाथ पकड़ लिया। उसकी आंखों में आंसू थे, लेकिन उसने खुद को संभाले रखा। उसे पता था कि अगर वह टूट गई, तो उसकी मां भी कमजोर पड़ जाएंगी।

"उसी रात, जब दर्द और बेचैनी की चादर ने रुशाली को घेर रखा था, उसकी तक़दीर एक नया मोड़ लेने वाली थी।"

वह अस्पताल के ठंडे फर्श पर बैठी थी, अपनी मां की हालत को लेकर परेशान, आंखों में नींद नहीं, दिल में अनगिनत सवाल। हर बीतता लम्हा उसे और भी ज्यादा अकेला महसूस करा रहा था। लेकिन उसे नहीं पता था कि उसी रात, उसकी ज़िंदगी में कोई ऐसा इंसान आने वाला था, जो शायद अनजाने में उसकी सबसे बड़ी ताकत बनने वाला था।

कभी-कभी ज़िंदगी हमें सबसे अंधेरी रातों में किसी ऐसे से मिलवाती है, जो हमारे दुखों का मूक गवाह बन जाता है। कोई ऐसा, जो खुद भी नहीं जानता कि वह किसी की कहानी का सबसे अहम किरदार बनने जा रहा है।

क्या यह मुलाकात सिर्फ एक संयोग थी, या फिर किस्मत की कोई गहरी साजिश? क्या यह अनजाना शख्स रुशाली की तकलीफों को कम कर पाएगा, या फिर यह भी एक अधूरी कहानी की शुरुआत थी?

जानने के लिए पढ़िए ‘दिल ने जिसे चाहा’ का अगला भाग…