Radha's Confluence - Episode 9 in Hindi Love Stories by Ramesh Desai books and stories PDF | राधा का संगम - प्रकरण 9

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राधा का संगम - प्रकरण 9

                

               राधा का संगम - प्रकरण 9

              उर्वशी बहुत डिमांडिंग टाइप थी. मैंने कभी ऎसा सोचा भी नहीं था हम लोग का रिश्ता इतनी हद तक आगे बढ़ जायेगा.

                ऊस पल मुझे ऎसा लगा था, भगवान ने इतने साल की प्यार की कमी उर्वशी के रूप मै पूरी कर दी थी.

                सेक्स के मुआमले मै वह दो कदम आगे रही थी. जो मैंने सपनो मै भी नहीं सोचा था वह ऊस ने मुझे सामने से दे दिया था.

               ऊस की यही आदत थी. वह खुद मुझे गलत करने को उकसाती रहती थी और कहती थी.

               " यह क्या कर रहे हो? "

                ऊस ने अपना टी शर्ट उतार कर अपना इरादा जाहिर कर दिया था. यह तो केवल शुरुआत थी.. बाद मै ऊस ने मुझ से बहुत कुछ मांगा था.

               वह मुझ  से ज़्यादा सेक्स की जानकारी रखती थी. हम लोग हर तीसरे दिन ऊस के घर मै मिलते थे. जाने से पहले फोन करता था. वह हमेशा मुझे एजेंडा के बारे मै पूछती थी.

                 एक बार मैंने फोन किया तो ऊस ने सीधा सवाल किया था.

                 " तुमने परसो मेंरे साथ जो किया वह अच्छा लगा था?

                 ऊस दिन भी ऊस ने यही सवाल किया था.

              " आप ने जो मेंरे साथ किया वह अच्छा था क्या? "

                ऊस के सवाल से मुझे ऎसा लगा था उसे वह पसंद नहीं आया था. ओर मैंने माफ़ी मांगते हुए कहां था.

               "तुम्हे अच्छा लगा तो अच्छा बुरा लगा तो बुरा. "          

              और बात यही खत्म नहीं हुई थी. दो दिन बाद जब मैंने उसे फोन किया तो ऊस ने सवाल किया था.

             " आप को वह अच्छा लगा था? "

             मैंने वोही जवाब दोहराया था ऊस ने मुझे चौंका दिया था.

            " मुझे भी अच्छा लगा था. "

            बस उसी घड़ी से हमारे रिश्ते मै नाट्यात्मक बदलाव आया था.

             ओर फिर तो हम मानो पति पत्नी बन गये थे.

              वह रोज नई फ़रमाइश करती थी.

               ओर उसे कोई डर था.. वह घर में अन्य लोग की मौजूदगी में मेंरे साथ सब कुछ करती थी.. कभी बेड रूम, होल, किचन, पैसेज या बाथरूम हर जगह मेंरे साथ बिंदास्त सब कुछ करती थी.

                वह अक्सर कुर्सी में बैठता था  ओर वह मेरी गोद में बैठ जाती थी ओर बहुत उछल कूद करती थी. उसे किसी चीज का डर नहीं लगता था. घर में बेड रूम में कभी ऊस की सासु मा ओर मजला बेटा होता था फिर भी बाहर होल में बिस्तर तैयार कर के रंग रलिया मनाती थी.

                कभी घर में ऊस के बड़े लडके की मंगेतर भी होती थी, लडके के दोस्त भी होते थे. वह लोग घर में  लाइन काम करते थे ओर वह बेड रूम का दरवाजा बंद कर के या किचन में सब कुछ मेंरे साथ करती थी.

             उसे कोई चीज का लिहाज या डर नहीं था.

             कभी कभी ऊस के पति का फोन आता था वक़्त हम लोग मस्ती करते थे.

              घर में यह सब कुछ करने में खतरा था. मैं उसे होटल में ले जाना चाहता था, फिर भी मेंरे कहने पर मेंरे एक रिश्तेदार के घर आती थी. हम लोग गार्डन में भी जाते थे.        

              मैं ऊस के साथ सब कुछ करना चाहता था.. ऊस के साथ स्नान करना चाहता था, ऊस से बच्चा भी चाहता था लेकिन ऊस के लिये माहौल सही नहीं था. सिर्फ एक हीं बात में ऊस ने नाराजगी जाहिर की थी.

              " मैं 69 नहीं करूंगी? "

               ऊस का नकार मेरी समज में नहीं आया था, मैंने कभी उसे पूछा भी नहीं था.

                हम लोगो का 12 साल का रिश्ता था. पहले छह साल समजो हमने बाप बेटी का रिश्ता निभाया था. लेकिन ऊस में लगे लगाना, उसे चूमना आम बात हो गई थी. ऊस के लिये ऊस ने कोई नाराजगी नहीं दर्शाई थी.

                एक बार मैंने बोस की केबिन में ऊस के कंधे पर हाथ रखकर मेरी तरह खिंच कर ऊस के गालों पर चुम्बन कर लिया था. जो उसे पसंद आया था..

               ऊस के बाद कुछ समय हम एक दूसरे से अलग हो गये थे. ऊस ने अपना भाड़े का घर भी बदल लिया था. मुझे ऊस के बारे में मुझे कुछ मालूम नहीं था.

              लेकिन हमारी किस्मत में दोबारा मिलना लिखा था.

               एक दिन गली के नुक्कड़ पर ऊस का पति मिल गया था. वह वड़ा पाऊ खा रहा था. ऊस की बाजु में एक वोकर भी था जो कुछ अंदेशा देता था. उसे चोट लगी थी.

              ऊस ने मुझे भी वादा पाऊ खिलाया. ऊस के बदले हुए बर्ताव ने मुझे चकित कर दिया था. शायद उर्वशी ने उसे बताया था की मैंने ऊस के परिवार को कितनी मदद की थी!

             वह मुझे अपने घर ले गया था. मुझे देखकर उर्वशी फूली नहीं समाई  थी.

             ओर यही से हमारी दूसरी इनिंग्स का प्रारम्भ हुआ था.

              उर्वशी मुझे ज्यादा मानने लगी थी.

               वह मेरा ख्याल रखती थी. ऊस ने खुद मुझे कहां था.

               " अब से हम लोग दुनिया की नजर में बाप बेटी है ओर हकीकत में हम बिस्तर. "

                ऊस ने खुल्लम खुल्ला यह बात की थी. मुझे भी सेक्स की जरूरत थी. मैंने ऊस की बात स्वीकार ली थी.

                ओर नये रिश्ते की शुरुआत हो गई थी.

                 हम लोगो के बीच बहुत कुछ होता था, लेकिन किसी को भी ऊस की भनक नहीं लगने दी थी.

                ओर हम हर तीसरे दिन आधा घंटा - घंटा पति पत्नी की भूमिका निभाते थे. उर्वशी कभी नास्ते के लिये 50-100 मांगती थी और मैं उसे दे देता था.

                 मैं तो बहाना बनाकर एक रात ऊस के घर में रहने को भी तैयार हो गया था लेकिन ऊस के पति ने इन्कार कर दिया था. ऊस से मुझे बुरा लगा था. लेकिन हमारे रिश्ते में कोई दरार नहीं आई थी.

                 मैंने उर्वशी के वीडियो भी उतारे थे. वह टोप लेस घर में चक्कर मारती थी. वह वीडियो मुझे बेहद पसंद था.

                लेकिन वही वीडियो गलती से फेसबुक की स्टोरी में वायरल हो गया था. जो ऊस के पति ने देख लिया था और इस संबंध का अंत हो गया था.

                उर्वशी अब से हम बाप बेटी है कर मुझ से दूर हो गई थी. -

               मुझे बार बार हमारा राज खुल जाने का डर लगता था. इस लिये मैं ऊस के घर में कुछ करना नहीं चाहता था. लेकिन नियति को यह मंजूर नहीं था.

               ऊस का पति उर्वशी के साथ क्या बात करेगा ऊस का मुझे डर लग रहा था.

             उसी वक़्त मुझे ऊस के पति के नाजायज रिश्ते की खबर मिली थी. 

             जो मैंने मोबाइल में ऊस के पति और सारे बेटों को भेजी थी.. जिस ने ऊस की बोलती बंद कार दी थी.

                         0000000000   ( क्रमशः)