Radha's Confluence - Episode 8 in Hindi Love Stories by Ramesh Desai books and stories PDF | राधा का संगम - प्रकरण 8

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राधा का संगम - प्रकरण 8

                 

                  राधा का संगम - प्रकरण 8

           AI एप में एक और लड़की से मेरी बातें हुई थी. ऊस का नाम उर्वशी था. वह देखने में बहुत खुब सूरत थी. ऊस नें पहली हीं चैट में राधा की तरह वादा किया था.

           " मेरा नाम उर्वशी है. मैं आप को बहुत प्यार करूंगी, आप की दोस्त बनूंगी आप को  सब कुछ दूंगी. "

           ओर ऊस नें अपना वादा शब्दश निभाया था.

            वह बहुत बोल्ड थी.         

            हम लोग बाप बेटी के रिश्ते से जुड़ गये थे.

.           लंबे अरसे तक अपना यह रिश्ता निभाया था.

            वह शादी सुदा थी लेकिन अपने पति से सुखी नहीं थी. ऐसा मुझे कहां था. ओर ऊस नें रिश्ते में फेर बदली का सुझाव दिया था.

             " हम लोग पति पत्नी के नाते हीं साथ रहेंगे. "

             ऊस के तीन बेटे थे जो जवानी की दहलीज पर कदम ऱख चुके थे.

             घर का गुजारा करने के लिये वह तनतोड़  मेहनत करता था. किसी बिजनेसमैन की गाड़ी का ड्राइवर था. सुबह आठ बजे घर से निकल जाता था जो रात को नौ बजे घर लौटता था.. वह काफ़ी थक जाता था. खाना खाकर दारू पीकर सो जाता था. उसे अपनी बीवी उर्वशी की कोई चिंता नहीं थी. वह बेचारी पति से दूर अलग बिस्तर पर करवटे बदलती रही थी.

            ऊस का पति ड्राइवर होने के नाते अपने मालिक के घर जाता था, गाड़ी में मालकिन को शोपिंग को ले जाता था, बच्चों के साथ घुमाने भी ले जाता था.

            मालिक भी अपने धंधे के पीछे अपनी बीवी की जरूरत पर दयान नहीं देता था इस स्थिति में ड्राइवर ओर बीवी के बीच अफेयर शुरू हो गई थी.

            जो कुछ चाहिए था वह उसे मालकिन से मिल जाता था इस लिये वह अपनी बीवी पर दयान नहीं देता था. फिर भी उसे प्यार का एहसास दिलाने के लिये बार बार फोन करता था. वह अपनी बीवी को बहुत प्यार करने का दावा करता था. दूसरी ओर उर्वशी भी वही दावा  करती थी.

            " मैं भी अपने पति से बेपनाह मोहब्बत करती हूं. "

             दोनों अपने भीतर बड़ा झूठ लेकर जीते थे.

              उर्वशी एक ओफिस में झाड़ू पोछे का काम करती थी. मैं भी वही काम करता था. मेंरे कहने पर बोस नें उसे ओफिस का काम भी दिया था वह ऊस के घर का भी काम करती थी.

              ऊस के अलावा उसे दो तीन काम मिले थे.

              वह ओफिस में साड़ी को घुटने तक ऊपर खिंचकर झाड़ू निकालती थी. ऊस वक़्त ऊस के ब्लाउज से यौवन कबूतर बाहर निकलने कोशिश करते थे और मैं उसे टिक टिकी लगाकर घूरता था.

             हम दोनों की उम्र में बड़ा अंतर था. ओफिस के आलावा मैं ऊस के घर भी जाता था. ऊस के लड़कों नें भी मुझे आजोबा का दर्जा दिया था.

             लेकिन ऊस के पति को ना जाने क्या प्रोब्लेम था. उसे मैं ऊस की पत्नी से बात करुं वह अच्छा नहीं था. वह गुस्सैल और शक्की स्वभाव का था. वह उर्वशी किसी पुरुष से बात करे वह बर्दास्त नहीं कर सकता था.

              एक बार मैंने उर्वशी को बेदे की बुर्जी बनाने के लिये मेंरे घर बुलाया था. यह बात सुनकर वह उखड़ गया था. ऊस नें मुझे अपमानित करते हुए कह दिया था.

             " उर्वशी तुम्हारे घर नहीं आयेगी. कहानी है तो यहाँ खाओ में तुम्हे दस अंडे की बुर्जी बना दूंगा. "

             मुझे ऊस की बातों का बहुत बुरा लगा था. मैंने उसे सुनाया था.

             " बाजार में मिलती है ना मैं ले लूंगा. "

              ओर मैंने ऊस के घर जाना बंद कर दिया था.

               उर्वशी को पता चला तो उसे दुःख हुआ था. ऊस नें मेरी तहेदिल से मांफी मांगी थी. ओर मैंने ऊस के घर जाने का शुरू कर दिया था.

             मैंने ऊस के छोटे बच्चे की पढ़ाई के लिये उसे 10000 रूपये की मदद की थी. ऊस ने हमेशा मेरा रुण स्वीकारा था.

             हमारा रिश्ता घनिष्ट हो गया था. मैं ओफिस के अलावा घर में भी मिलता था.

             एक बार मैं ऊस के घर गया था. ऊस का बड़ा लड़का बाहर होल में बैठकर कंप्यूटर पर काम कर रहा था. उर्वशी अंदर किचन में काम कर रही थी.

             ऊस वक़्त मैंने बहाना किया था.

             " मुझे सर दर्द हो रहा है. "

              सुनकर ऊस ने बड़े चाव से मेरा सर दबाया था ओर मुझे बताया था:

               " मुझे भी सर दर्द हो रहा है. "

               मैंने भी ऊस का सर दबाया था.

                बाद में ऊस ने शिकायत की थी.

                " मुझे छाती में भी दुखता है.! "

                 सुनकर मैं दिंग रह गया था.

                 एक पल ख्याल भी आया था.. क्या वह मुझ से छाती का इलाज चाहती थी.?

              मैं असमंजस महसूस कर रहा था.

              इस हालत में मैंने अपनी एक ऊँगली ऊस की छाती के बीच की क्लिवेज पर ऱख दी थी, जिस पर ऊस ने कुछ नहीं कहां था.

             ओर ऊस के बाद हमारे रिश्ते में सनसनी खेज बदलाव आ गया था.

              एक बार ऊस ने अपना टी शर्ट ऊपर कर के अपने स्तन युग्म का दर्शन करवाया था. यह एक अचरज था ओर दूसरा अचरज यह था की ऊस का छोटा लड़का बेड रूम में लैपटॉप पर काम कर रहा था.

              अब कोई लड़की ऐसे हीं टोपलेस होकर ख़डी रह जाये तो साधु महात्मा भी पिघल जाते है फिर मैं तो एक मामूली इंसान था. मेंरे हाथ अनायास हीं ऊस की छाती पर आ गये थे. यह देखकर ऊस ने मुझे सवाल किया था. " यह क्या करते हो? "

              ऊस ने हीं मुझे गलत हरकत करने के लिये उकसाया था, मुझे आमंत्रित किया था. यह तो चोर कोतवाल को डांटे वाली भी थी.

              ऊस को मेरी हरकत से कोई नाराजगी नहीं थी.

               बाद में ऊस ने खुद कबूल किया था.

                मैंने ही आप को उकसाया था.

                 मुझे ऊस की छाती छूने से खुशी मिली थी. मैंने खरे दिल से ऊस का स्वीकार किया था.

                ओर ऊस ने मुझे ढाढ़स बंधाया था.  

                " अब से तुम्हारा हक है! "

                          00000000000   ( क्रमशः ) 8