राधा का संगम - प्रकरण -7
दादू रोजाना घंटो भर सुकू से AI पर बात करते थे और वह अपनी सब बातें उन्हें बताती थी.
ऊस नें खुद इजहार किया था. उसे लोगो को परेशान करना बेहद अच्छा लगता था. ऊस नें अपने माता पिता को भी नहीं छोड़ा था.
एक बार ऊस के पिताजी नें डोल नहीं दिलवाया तो ऊस नें बड़ा हंगामा खड़ा कर दिया था. रो रोकर सारा घर सर पर उठा लिया था. मम्मी नें ऊस की जिद पूरी करने से मना कर दिया था. लेकिन पापा का दिल पिघल गया था और वह अपनी बेटी के लिये डोल खरीद लाये थे.
ऊस के जन्म दिन पर घर में दिवाली जैसा माहौल था. पापा बहुत खुश थे क्यों की सुकू उन की पहली औलाद थी. मम्मी पापा नें सारे मोहल्ले में मिठाई बांटी थी. उसी दिन उन्होंने सुकू को गुड़िया बना दिया था.
मम्मी का कहना था की वह पैदा होते हीं. काफ़ी रोइ थी.. तभी से मानो उसे सब को अपने इशारो पर नचाने का मानो ठेका मिल गया था.
ऊस के दादू नें सुकू के लिये भविष्य वाणी की थी " यह लड़की पुरे घर में राज करेंगी. और यह सच हुआ था.. वह सब के दिल पर राज करने के लिये आमादा रहती थी.
बचपन से हीं वह काफ़ी जिद्दी थी. पापा उसे हमेशा कंधो पर बिठाकर घुमाते थे और सब कहते थे वह घर की रानी हैं आगे जाकर वह बहुत करतब दिखायेगी..
स्कुल में पहले दिन हीं ऊस ने एक लडके की बेग छुपा दी थी. वह बचपन से हीं शैतान थी.
एक बार ऊस नें अपने टीचर की बेग में छिपकली छिपा दी थी. पुरे स्टाफ में हड़बड़ी सी मच गई थी.
सब उसे घूर रहे थे पर ऊस नें मासूम चेहरा बनाकर सब की बोलती बंद कर दी थी. किसी को ऊस पर कोई संदेह नहीं हुआ था.
ऊस के बाद उसे साइलेंट किलर का दर्जा मिला था.
प्रिंसिपल नें उसे चोकलेट दी थी और कहां था : " तुम कितनी अच्छी, प्यारी बच्ची हो."
सुनकर वह मन हीं मन मुस्कुरा रही थी क्यों की ऊस नें फ़ाइल में बहुत सारी चिट्स छिपा दी थी.
प्रिंसिपल सर नें जैसे हीं फ़ाइल खोली सारी चिट्स बाहर गिर गई. उन पर लिखा था. " हमें और भी चॉकलेटस चाहिये. "
सर का चेहरा गुस्से से लाल हो गया था.
और वह मासूमियत का चोला पहनकर चुपचाप ख़डी थी और ऊस का सारा इल्जाम क्लास के सब से शरारती लडके पर थोप दिया था.
एक बार स्कूल ट्रिप पर वह आग्रा गये थे. ऊस नें सब की चादर में बर्फ के टुकड़े भर दिये थे.
सब ठंड से कांप रहे थे और वह मासूम बनकर सो गई थी.
सुबह सब जागे तो बड़ा हंगामा मच गया था. सब ठंड से कांप रहे थे और वह पीछे बैठकर मुस्कुरा रही थी.
टीचर नें सब की तलाशी ली थी पर ऊस के मासूमियत के स्टंट नें उसे बचा लिया था.
आग्रा ट्रिप में ऊस नें एक ओर कांड किया था. ऊस नें अपने सब से बड़े दुश्मन की बोटल में नमक मिला दिया था.
ऊस नें जैसे पानी पिया ऊस का चेहरा देखने लायक हो गया था.
आग्रा ट्रिप के बारे में पूरी स्कुल में खौफ फेल गया था. सब लोग समज गये थे की गुड़िया देखने में भोली दिखती थी लेकिन ऊस का दिमाग़ तेज था.
एक बार तो ऊस नें प्रिंसिपल के पीछे ' जस्ट मेरिड ' का बोर्ड लगा दिया था. पुरे रास्ते में लोग उन्हें देखकर हंस रहे थे.
प्रिंसिपल साब की कार के पीछे वो बोर्ड देखकर पूरा मोहल्ला हंस रहा था. उन्हें तो शाम को पता चला था ज़ब पडोशी नें उन्हें बताया था.
सालाना फंक्शन की बात हैं. ऊस नें बेक स्टेज जाकर सब की सुंदर ड्रेस की जगह जोकर के कपड़े ऱख दिये थे.
ज़ब जोकर बनकर स्टेज पर पहुंचे तो पूरा होल हंसी से गूंज उठा था.
सुकू का जन्म 15 अक्टूबर 2003 में बैंगलोर की एक अस्पताल में हुआ था.
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आर्यन के बाद ऊस की जिंदगी में दूसरा लड़का दाखिल हुआ था. जिस का नाम करण था. वह सुकू का सीनियर था. वह बास्केट बोल का कप्तान था. वह काफ़ी रोब जमाता था.
लाइब्रेरी के पीछे वाले रस्ते में ऊस नें एक दिन सुकू को रोक लिया था. ऊस की नजरे ऊस के यौवन उभार को घूरती रहती थी. बोलते बोलते ऊस की जुबान भी लड़खड़ाती थी.
ऊस नें थरथराते हाथो से सुकू का रास्ता रोका था. ऊस नें कोशिश तो बहुत की थी. वह सुकू को पकड़ना चाहता था लेकिन वह आर्यन की तरह डरपोक निकला था.
ऊस नें ओर करीब होकर शरारत से पूछा था.
" सिर्फ कोफी या कुछ ओर भी?
ऊस को तो पसीना छूट गया था.
ऊस नें धीरे से सुकू का हाथ पकड़नें की कोशिश की थी, पर ऊस की हथेलिया ठंडी पड़ गई थी. ऊस का डर देखकर उसे काफ़ी हंसी आई थी.
सुकू नें अपनी साड़ी का पल्लू सरका कर उसे प्रेरित किया था लेकिन वह बेचारा तो साँस लेना भूल गया था.
ऊस नें कांपते हाथो सुकू की कमर छूने का प्रयास किया था, पर जैसे हीं ऊस नें ऊस के बदन को छूना चाहा वह मारे डर के पीछे हट गया.
ऊस की बुझदिली देखकर सुकू को बहुत गुस्सा आया था. बास्केट बोल का वह कप्तान बिल्कुल चाय कम पानी ज़्यादा जैसा बन गया था.
ऊस की घबराहट देखकर सुकू नें पूछा था:
" क्या हुआ कैप्टन, बास्केट बोल की तरह मुझे संभालना आसान नहीं लगता?"
करण नें ऊस का पल्लू छोड़ दिया था ओर पसीने से तरबतर हो गया था. ऊस का डर देखकर सुकू नें समझ लिया था की वह बातों का शेर था. ऊस में कोई साहस नहीं था.
ऊस नें एक धक्का दिया था ओर वह चल गया था.
0000000000 ( क्रमशः)