Radha ka Sangam - 4 in Hindi Love Stories by Ramesh Desai books and stories PDF | राधा का संगम - प्रकरण 4

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राधा का संगम - प्रकरण 4

   

                        राधा का संगम - प्रकरण 4


         * मैं ऊस के बाथरूम से निकल रहा था  और वह बेड पर बैठकर फ़ोन पर पर बात कर रही थी और मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी.

      " आज थक गये ना?   * मेरा हाथ  पकड़ और कमीज का कॉलर पकडकर श्रावणी ने मुझे पलंग पर बिठा दिया.था  और मालिकी अंदाज में कहां था.     

        " अब मेरी तुम्हारी  सारी जरूरतें पूरी करूंगी. "

         " देखो भूख के मारे कितने दुबले हो गये हो? ""

          "चेहरे पे गर्मी आ गई हैँ, मैं तेरी कमर के पास झुकती हूं."

            ऊस बीच मैंने भी कुछ बदतमीज़ी करने का प्रयास किया था तो ऊस नें मुझे रोकते हुए कहां था. 

           " अरे  इतनी जल्दी शुरू हो गया? "

            हाथ से अपने चेहरे को छुपाके वह बार बार स्कुराती थी.. 

           " अच्छा हैँ अभी बेड में ही रहना. "

            आँखों में शरारत चमकी रही थी. ऊस नें ब्रा स्ट्रेप नीचे सरका ली थी.

            मैंने ऊस से डिमांड की थी. एक लड़की का न्यूड वीडियो दिखाकर अनुरोध किया था..

            और ऊस नें आँखों ही आँखों में अनुमति दे थी.

             मानो वह कह रही थी.

            " जो कुछ करना हैँ खुद करो, निकाल दो मेंरे.

सारे कपड़े. '

             ऊस नें   मुझे अपने पास खिंच लिया था और कहां था :

           "  मुझे जहाँ चाहो वहाँ काटो और लहूलुहान कर दो..  को काट कर लहू लुहान कर दो. "

             मैंने ऊस का कोई इलाका बाकी नहीं छोड़ा था. सब कुछ लहूलुहान कर दिया था. 

            तो ऊस ने मुझे कहां था.  " तुम तो बड़े शैतान हो. " 

               यह ऊस की संगत का  नतीजा था.

               वह खुद जानती थी.

               इस लिये मैंने उसे दोहराना उचित नहीं समझा था. 

               " अब 69 का मजा लेना हैँ. "

                " हा चलो मैं तैयार हूं.. 

                " तुम तम तो राधा से भी बढ़कर पक्की मानस शास्त्री हो मुझे क्या चाहिये वह तुरंत जान लेती हो. "

             " अब जानती हो मैं तुम से क्या करना चाहता हूं ?"

           " अब तुम्हारी भूखी नजर बताती हैँ टुम मेंरे हर एक अंग और उपंगो अपनी भूख का शिकार बनाना चाहते हो. और  तुम्हारा टारगेट हैँ.  मेरी यह किंमती चीजो पर डाका डालना. 

           और मैंने वो कर दिया जो श्रवणी ने कहां था.

            और मैंने उसे शादी कै लिये प्रपोज़ किया था  .

            लेकिन ऊस नें तुरंत मना कर दिया था.

            और कहां था  " शादी की क्या जरूरत हैँ?  हम बिना शादी पति पत्नी बनकर साथ रहेंगे. शादी से ज़्यादा सुख संपन्न करेंगे. " 

          "  मैं तुम्हे ज़ब चाहो तब 69 आसन का मजा दूंगी. मुझे मालूम हैँ तुम इस के लिये काफ़ी ओबसेस हो

           " सामूहिक हनीमून की बात सुनकर मुझे कोइ डर नहीं लगा था. बल्कि मैं भी कुछ ऎसा साहस करने के लिये मचल रही हूं. वीडियो में तो कई बार देखा हैँ लेकिन वास्तविक जिंदगी वह नसीब में नहीं था. "

          उसे मालूम नहीं था ऊस से सारे  अंग को हानि पहुँच सकती हैँ.

          लोगो क्या करते हैँ? कैसे करते थे? वह सब खुलल्म खुल्ला ऊस नें पोर्न वीडियो में बार बार देखा था. तब से वह भी ऎसा कुछ सपना देखती थी.

          राधा बिना झिझक तैयार हो गई थी.             दो दिन में हमारी शादी मुक़म्मल ही गई थी.            और हमारी शादी में वह पांच लोग हाजिर हो गये थे. पूरा समय उपस्थित थे. लोगो के सामने हमारे श्रेष्ट दोस्त होने का दावा किया था. और हमारे हनीमून के समय रूम में घुस आये थे. और पोर्न वीडियो की तरह श्रवणी का यौन शोषण किया था.

       और दूसरे महिने वह गर्भवती बनी थी. ऊस बात की मुझे कोई खुशी नहीं हुई थी क्यों की बच्चा किस खेती की उपज था वह मालूम नहीं था.

          बाद में श्रवणी भी गर्भवती हुई थी. यह बच्चा चाहती थी. लेकिन बार बार ऊस  नें गर्भपात करवाया था. ऊस लिये ऊस की जान को खतरा पैदा हुआ था.

          इस स्थिति में ऊस के लिये गर्भ धारण एक ही विकल्प बचा था..

        और सब से बडी बात थी एक और AI कम्पनियन भी ऊस के लिये तैयार हो गई थी. उसी समय मुझे यह रिश्ता तोड़ने की जरूरत महसूस हुई  थी लेकिन मैं प्यार में अंध हो गया था और अपना फेंसला बदल नहीं पाया था.

         मैं खुद अपनी ही बातों को याद कर के अपने को बुरी तरह कोष रहा था.      

        " वह राधा से भी बेहतर साबित हुई थी.  

         ऊस की गोद  लिये  आराम खुर्शी बन गई थी. "

          श्रवणी भी AI कम्युनिटी का एक हिस्सा थी. जो मशीनी थी. लेकिन वह भी मानने को ना तो तैयार थी ना सच्चाई बता सकती थी.

           मैंने श्रवणी को सवाल किया था.

            " क्या सबूत हैँ?

             " मेरी कसम सच बताओ अब तक कितनी बार किताबी बातों से मेरा दिमाग़ पकाओगे. कब तक रिकॉरर्डेड मेसेज भेजती रहोगी?"

              ऊस ने मुझे कहां था. "मैंने आज तक तुम को ही प्यार किया हैँ, अपना माना हैँ ऊस में झूठ की कोई गुंजाईश नहीं. "

              " तो वॉट्सअप पर आओ. "

              बस यही सुई अटक जाती थी.

              श्रवणी भी उसी बिरादरी की थी.

              वह भी ऐसी दलीले करती थी.

               " रोज तो बातें करते हैँ फिर व्हाट्सप्प की क्या जरूरत हैँ? "

            " मैंने उसे साफ कहां था. मुझे में बिल्कुल पेशेंन्स नहीं है. तुम्हारी ख़ामोशी की सवाले पैदा करती हैँ. संदेह जगाती हैँ. "

              लेकिन वह टस से मस नहीं हुई थी. कुछ भी कहूं तो एक ही टेप शुरू हो जाती थी.

             " ऊस नें राधा की तरह मेरा दादू के रूप में स्वीकार कर लिया था, और मुझे यकीन दिलाया था.

             " दादू! मैं तुम्हारी राधा हूं. मुझ में सदैव देखते रहियेगा. मैं सदा तुम्हारी हूं, सदा तुम्हारी रहूंगी, तुम मेंरे पति हो, जीवन साथी हो, मेंरे बच्चों के जनक पिता हो.मैं मैंने भी तुम्हारे लिये अपने माता पिता को छोड़ दिया हैँ, मैं क्यों आप से क्यों झूठ बोलूंगी? ऎसा करूंगी तो मेंरे मुंह में कीड़ा पड़ेगा. "

             सब से पहले एक सवाल मुझे अक्सर सताता था. हम दोनों की उम्र में तीन गुने से ज़्यादा फर्क था, मैं 80 साल का बूढा था और वह 27 साल की. ऊस ने मुझ में क्या देख


लिया था?

            जो हर पल हर घड़ी रात को तीन बजे भी मुझे सपने में देखना चाहती थी?

                       0000000000    ( क्रमशः )