अगस्त्य सय्युरी के साथ तुरंत कार में बैठा, और कार सीधा अस्पताल पर रुकी।
वह कार से निकला… आगे बढ़ने लगा ही था कि उसका सिर बहुत तेज़ चकराया और वह लड़खड़ा गया। सय्युरी ने तुरंत उसे पकड़ लिया।
अगस्त्य ने खुद को संभालते हुए कहा—
“मैं ठीक हूँ… चलो…”
वह आगे बढ़ने लगा कि पीछे से सय्युरी ने उसका हाथ पकड़ लिया।
सय्युरी (दबी हुई आवाज़ में):
“अगस्त्य…”
वह रुक गया, पीछे पलटा और बेसब्री के साथ बोला—
“चलो…”
सय्युरी ने अपनी पकड़ उसकी कलाई पर और कस ली और इशारे से उसका ध्यान उसके शरीर की ओर दिलाया।
अगस्त्य ने जब खुद को देखा, तो उसके शरीर पर जले हुए निशान उभर आए थे, जो धीरे-धीरे बढ़ते जा रहे थे। उसकी आँखें लाल हो चुकी थीं और उसके शरीर से पसीना पानी की तरह टपक रहा था।
फिर भी, अद्भुत हिम्मत के साथ उसने कहा—
“मैं ठीक हूँ, सय्युरी… चलो…”
सय्युरी (रोते हुए):
“ये सब मेरा श्राप तोड़ने का नतीजा है…”
अगस्त्य ने धीरे से उसका हाथ छुड़ाया, उसके थोड़ा पास आकर कोमल लेकिन दृढ़ स्वर में कहा—
“गरुड़ लोक तुम्हारा भी है। मेरी वजह से तुम शापित हुई थी… तो मैंने कुछ खास नहीं किया… अब चलो।”
इतना कहकर वह तेज़ क़दमों के साथ रात्रि के कमरे की ओर बढ़ गया।
🌌 दृश्य: ICU के बाहर
A.V. खुशी से उसकी ओर देखने लगा, लेकिन जैसे ही उसकी हालत पर नज़र पड़ी, वह डर गया।
A.V.:
“अगस्त्य!!!!”
अगस्त्य (कमज़ोर लेकिन दृढ़ स्वर में):
“कुछ नहीं हुआ मुझे… तुम ये लो… रात्रि को इसकी गंध सुंघाओ… और… और… और… अर्जुन… अर्जुन को… फोन!!”
A.V. ने तुरंत वह गरुड़ पुष्प अनुज को दे दिया।
अनुज भी जल्दी से वह पुष्प लेकर रात्रि के पास ICU में चला गया।
इधर A.V. ने तुरंत अर्जुन को फोन किया।
पीछे-पीछे सय्युरी भी आ गई।
अगस्त्य की साँसें अब टूटने लगी थीं… वह धीरे-धीरे कमज़ोर पड़ने लगा।
A.V. (घबराकर):
“सय्युरी, क्या हुआ इसे?”
सय्युरी (रोती हुई आवाज़ में):
“गरुड़ लोक गया था…”
तभी अगस्त्य फिर से लड़खड़ा गया। A.V. और वहाँ से गुज़रते एक ward boy ने उसे संभाल लिया।
अगस्त्य उस ward boy के कंधे पर टिक गया।
और तभी…
अगस्त्य के कानों में एक फुसफुसाहट भरी रहस्यमयी आवाज़ गूँजी—
“बड़े भैया… मुझे याद तो किया ना…?”
बेहोशी की हालत में भी अगस्त्य सन्न रह गया।
उसकी धड़कनें तेज़ हो गईं। उसने अपनी बची-खुची ताकत समेटते हुए आँखें खोलने और खड़े होने की कोशिश की—मानो वह उस आवाज़ को पहचान चुका हो।
Ward Boy (A.V. से):
“उन्हें संभालिए…”
कैमरा अगस्त्य के चेहरे पर ठहर जाता है—जहाँ दर्द, आश्चर्य और आने वाले तूफ़ान की आहट एक साथ दिखाई देती है।
वह ward boy जाने लगा…
अगस्त्य ने अपनी बंद होती हुई आँखों से उसे देखने की कोशिश की।
उस ward boy का पूरा चेहरा ढका हुआ था, लेकिन उसकी आँखें चमक रही थीं…
अगस्त्य उन आँखों को पहचानता था—
तीखी… शातिर… हरी आँखें…
वह उन्हें भली-भाँति जानता था।
अगस्त्य ने काँपती हुई आवाज़ में कुछ कहने की कोशिश की—
अगस्त्य (टूटती साँसों के साथ):
“क… क… क… कनि… कनि… कनिष्क…”
लेकिन उसकी आवाज़ इतनी धीमी थी कि वहाँ मौजूद A.V. और सय्युरी में से कोई भी समझ नहीं पाया।
अगले ही पल, अगस्त्य की आँखें पूरी तरह बंद हो गईं—
वह अब पूरी तरह बेहोश हो चुका था।
A.V. ने तुरंत उसे संभाला।
उसका हाथ सहारा देने के लिए अगस्त्य के दाहिने कंधे पर गया।
लेकिन जैसे ही उसने उसे थामने की कोशिश की, A.V. की नज़र अपने हाथ पर पड़ी—
उसका हाथ पूरी तरह लाल हो चुका था…
खून…!
सय्युरी (दहशत भरी चीख के साथ):
“अगस्त्य!!!!”
उसकी यह चीख इतनी तीव्र और दर्दभरी थी कि कमरे के भीतर रात्रि भी अपनी बेहोशी से बाहर आने लगी।
रात्रि (नींद से जागते हुए, धीमी लेकिन स्पष्ट आवाज़ में):
“वर्धाaan…!”
इधर A.V. ने घबराकर अगस्त्य के कंधे की ओर देखा—
उसका कंधा पूरी तरह खून से लथपथ था।
अगस्त्य को गोली लगी थी…
A.V. की आँखों में भय और क्रोध एक साथ उमड़ पड़े।
A.V. (हैरानी और गुस्से में):
“ये सब… वो ward boy!!?”
तभी तेज़ क़दमों की आहट के साथ अर्जुन वहाँ पहुँच गया।
A.V. (घबराई हुई आवाज़ में):
“अर्जुन! वो ward boy… अगस्त्य पर गोली चला कर गया है!”
अर्जुन (अगस्त्य को देखकर, भावुक स्वर में):
“भाई…!”
अर्जुन ने तुरंत स्थिति को संभालते हुए दृढ़ स्वर में कहा—
अर्जुन:
“इन्हें यहाँ से ले चलना होगा… अभी।”
सय्युरी और अर्जुन ने मिलकर सावधानी से अगस्त्य को संभाला।
उसका निस्पंद शरीर, बहता हुआ खून, और चारों ओर फैला तनाव—सब कुछ आने वाले तूफ़ान की आहट दे रहा था।
सय्युरी और अर्जुन, अगस्त्य को तुरंत उसके घर ले गए—
जहाँ अब सिर्फ़ एक ही लक्ष्य था—
उसे बचाना…...